
नई दिल्ली: नवभारत टाइम्स (एनबीटी) द्वारा आयोजित एनबीटी उत्सव में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय संस्कृति, जिम्मेदार पत्रकारिता और आत्मनिर्भर भारत के महत्व पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक ताकत केवल उसकी आर्थिक या सैन्य क्षमता में नहीं, बल्कि उसकी सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक मूल्यों और नागरिकों की भागीदारी में भी निहित होती है।
भारतीय संस्कृति हमारी सबसे बड़ी पहचान
अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत सदियों से दुनिया को प्रेरित करती रही है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे आधुनिक तकनीक और वैश्विक सोच को अपनाने के साथ-साथ भारतीय परंपराओं, संस्कारों और सांस्कृतिक मूल्यों से भी जुड़े रहें। उनका मानना था कि विकास तभी सार्थक है, जब वह अपनी जड़ों से जुड़ा हो।
खादी: आत्मनिर्भरता और स्वाभिमान का प्रतीक
कार्यक्रम में सहयोगी के रूप में शामिल खादी इंडिया का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि खादी केवल एक वस्त्र नहीं, बल्कि देश के स्वतंत्रता आंदोलन, स्वदेशी भावना और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने लोगों से स्थानीय उत्पादों को अपनाने और “वोकल फॉर लोकल” की भावना को मजबूत करने का आग्रह किया।
पत्रकारिता की जिम्मेदारी पर दिया विशेष संदेश
राजनाथ सिंह ने मीडिया की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता केवल समाचारों का प्रसारण भर नहीं है, बल्कि समाज को सही दिशा देने का एक प्रभावी माध्यम भी है। उन्होंने मीडिया संस्थानों से तथ्यपरक, संतुलित और सकारात्मक पत्रकारिता को बढ़ावा देने की अपील की, ताकि लोकतंत्र और सामाजिक विश्वास और मजबूत हो सके।
युवाओं को संस्कृति से जुड़ने का आह्वान
उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य युवा पीढ़ी के हाथों में है। यदि युवा आधुनिक शिक्षा और नवाचार के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत को भी अपनाएंगे, तो देश विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
संवाद और सांस्कृतिक आयोजनों का महत्व
एनबीटी उत्सव जैसे मंच समाज के विभिन्न वर्गों को एक साथ लाकर विचार-विमर्श का अवसर प्रदान करते हैं। ऐसे आयोजन साहित्य, कला, पत्रकारिता, संस्कृति और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को एक मंच पर लाते हैं, जिससे समाज में सकारात्मक संवाद और जागरूकता का विस्तार होता है।
आत्मनिर्भर भारत और सांस्कृतिक चेतना का समन्वय
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भर भारत केवल आर्थिक विकास का अभियान नहीं है, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक पहचान, स्वदेशी सोच और आत्मविश्वास को सशक्त बनाने का व्यापक प्रयास है। जब आर्थिक प्रगति और सांस्कृतिक मूल्यों का संतुलित विकास होगा, तभी भारत विश्व पटल पर और अधिक सशक्त राष्ट्र के रूप में उभरेगा।
निष्कर्ष
एनबीटी उत्सव में राजनाथ सिंह का संबोधन इस बात का संदेश देता है कि भारत की प्रगति का आधार केवल तकनीकी और आर्थिक उपलब्धियां नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, जिम्मेदार मीडिया, जागरूक नागरिक और आत्मनिर्भर सोच भी हैं। ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक संवाद को बढ़ावा देने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और राष्ट्रीय मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।
