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एमएस अधिनियम, 2013 के तहत नए सर्वेक्षण में एक भी मैनुअल स्कैवेंजर नहीं मिला, NAMASTE योजना के तहत 89,915 सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मियों की हुई पहचान

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भूमिका

भारत में स्वच्छता व्यवस्था को सुरक्षित, सम्मानजनक और आधुनिक बनाने की दिशा में केंद्र सरकार लगातार कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इसी क्रम में सरकार ने ‘मैनुअल स्कैवेंजर्स के रूप में नियोजन का प्रतिषेध एवं उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 (MS Act, 2013)’ के तहत देशभर में एक नया सर्वेक्षण कराया। इस सर्वेक्षण में सरकार के अनुसार एक भी मैनुअल स्कैवेंजर की पहचान नहीं हुई, जो स्वच्छता व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

हालांकि, दूसरी ओर NAMASTE (National Action for Mechanised Sanitation Ecosystem) योजना के अंतर्गत पूरे देश में 89,915 सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मियों की पहचान की गई है। इन कर्मियों को सुरक्षित कार्य परिस्थितियां, सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास और वैकल्पिक आजीविका उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार कार्य कर रही है।


क्या है मैनुअल स्कैवेंजिंग?

मैनुअल स्कैवेंजिंग वह अमानवीय प्रथा है, जिसमें व्यक्ति बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के मानव मल या सीवर तथा सेप्टिक टैंक की हाथ से सफाई करता है। यह न केवल मानव गरिमा के विरुद्ध है बल्कि स्वास्थ्य और जीवन के लिए भी अत्यंत जोखिमपूर्ण कार्य माना जाता है।

भारत में इस प्रथा को समाप्त करने के लिए कई वर्षों से कानूनी और प्रशासनिक प्रयास किए जा रहे हैं।


एमएस अधिनियम, 2013 क्या है?

वर्ष 2013 में केंद्र सरकार ने “मैनुअल स्कैवेंजर्स के रूप में नियोजन का प्रतिषेध एवं उनका पुनर्वास अधिनियम” लागू किया।

इस कानून के प्रमुख उद्देश्य हैं—

यह अधिनियम मानव गरिमा की रक्षा और सामाजिक न्याय को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कानून माना जाता है।


नए सर्वेक्षण के प्रमुख निष्कर्ष

सरकार द्वारा प्रस्तुत जानकारी के अनुसार—

हालांकि सरकार यह भी स्पष्ट करती है कि यदि कहीं भी ऐसी कोई घटना सामने आती है तो उसके विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की जाती है।


NAMASTE योजना क्या है?

NAMASTE (National Action for Mechanised Sanitation Ecosystem) केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्य सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई को पूरी तरह सुरक्षित और यांत्रिक बनाना है।

इस योजना का लक्ष्य केवल मशीनों का उपयोग बढ़ाना ही नहीं बल्कि सफाई कर्मचारियों को सम्मानजनक जीवन और सुरक्षित रोजगार उपलब्ध कराना भी है।


89,915 सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मियों की पहचान

NAMASTE योजना के अंतर्गत देशभर में अब तक 89,915 सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मियों की पहचान की जा चुकी है।

इन कर्मियों को विभिन्न प्रकार की सुविधाएं प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें शामिल हैं—

इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति बिना सुरक्षा उपकरणों के खतरनाक सफाई कार्य न करे।


यंत्रीकृत सफाई व्यवस्था पर विशेष जोर

सरकार लगातार इस दिशा में कार्य कर रही है कि—

यंत्रीकरण से न केवल दुर्घटनाओं में कमी आती है बल्कि कार्य की गुणवत्ता और दक्षता भी बढ़ती है।


सुरक्षा उपकरण क्यों आवश्यक हैं?

सीवर और सेप्टिक टैंक के भीतर जहरीली गैसें जैसे—

मौजूद हो सकती हैं।

इन गैसों के संपर्क में आने से व्यक्ति बेहोश हो सकता है और कई बार जान भी गंवा सकता है।

इसी कारण सरकार सभी सफाई कर्मियों के लिए अनिवार्य सुरक्षा उपकरणों पर जोर दे रही है।


पुनर्वास पर विशेष ध्यान

सरकार का उद्देश्य केवल मैनुअल स्कैवेंजिंग रोकना नहीं बल्कि प्रभावित परिवारों का सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास भी है।

इसके अंतर्गत—

जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

इससे प्रभावित परिवार सम्मानजनक जीवन की ओर आगे बढ़ सकते हैं।


स्वच्छ भारत मिशन से जुड़ाव

स्वच्छ भारत मिशन के बाद देशभर में—

इन प्रयासों ने मैनुअल स्कैवेंजिंग जैसी प्रथाओं को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।


स्थानीय निकायों की भूमिका

नगर निगम, नगर पालिका और ग्राम पंचायतें इस अभियान की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

इनकी जिम्मेदारियों में शामिल हैं—


तकनीक बनेगी सबसे बड़ा समाधान

आज देश में कई आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ रहा है—

इन तकनीकों से मानव जोखिम कम होता है और सफाई कार्य अधिक सुरक्षित बनता है।


चुनौतियां अभी भी मौजूद

यद्यपि सर्वेक्षण में किसी मैनुअल स्कैवेंजर की पहचान नहीं हुई, फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं—

इन चुनौतियों का समाधान सरकार, स्थानीय निकायों और समाज के साझा प्रयासों से ही संभव है।


सामाजिक सम्मान भी उतना ही जरूरी

स्वच्छता कर्मी शहरों और गांवों को साफ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए उनके प्रति सम्मान, समान अवसर और सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करना प्रत्येक नागरिक और संस्था की जिम्मेदारी है।

मानव गरिमा, सुरक्षित कार्य परिस्थितियां और सामाजिक सुरक्षा किसी भी आधुनिक समाज की पहचान होती हैं।


निष्कर्ष

एमएस अधिनियम, 2013 के तहत हुए नए सर्वेक्षण में एक भी मैनुअल स्कैवेंजर की पहचान न होना भारत के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। वहीं NAMASTE योजना के अंतर्गत 89,915 सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मियों की पहचान यह दर्शाती है कि सरकार अब स्वच्छता क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों की सुरक्षा, सम्मान और पुनर्वास पर विशेष ध्यान दे रही है।

आने वाले वर्षों में यदि यंत्रीकृत सफाई व्यवस्था का विस्तार, सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन, आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग और सामाजिक पुनर्वास कार्यक्रम प्रभावी ढंग से लागू होते हैं, तो भारत न केवल मैनुअल स्कैवेंजिंग जैसी अमानवीय प्रथा का स्थायी रूप से उन्मूलन कर सकेगा, बल्कि स्वच्छता कर्मियों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और गरिमापूर्ण कार्य वातावरण भी सुनिश्चित कर पाएगा। यही एक समावेशी, संवेदनशील और विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

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