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एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी पर गंभीर आरोप: कार दुर्घटना क्लेम का पूरा अप्रूवल न मिलने से परेशान उपभोक्ता ने री-इंस्पेक्शन की उठाई मांग

प्रयागराज, 03 जुलाई 2026।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से वाहन बीमा क्लेम से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसमें एक उपभोक्ता ने एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी पर दुर्घटना में हुए नुकसान का पूरा बीमा क्लेम स्वीकृत न करने का आरोप लगाया है। उपभोक्ता का कहना है कि उनकी बोलेरो कार दुर्घटना में आगे और पीछे दोनों तरफ से क्षतिग्रस्त हुई थी, लेकिन कंपनी ने केवल सामने के कुछ हिस्सों की मरम्मत को मंजूरी दी, जबकि पीछे हुए नुकसान को क्लेम में शामिल नहीं किया गया। इस निर्णय के बाद उन्होंने कंपनी से वाहन का तत्काल री-इंस्पेक्शन कराने की मांग की है।

जानकारी के अनुसार, कमलाकर सिंह की बोलेरो (वाहन संख्या UP73AK3591) सड़क दुर्घटना का शिकार हो गई थी। वाहन का बीमा पॉलिसी संख्या MIB/1503590 के अंतर्गत था तथा दुर्घटना के बाद दर्ज बीमा दावे को क्लेम संख्या MVO4006698 प्रदान की गई।

उपभोक्ता के अनुसार, कंपनी की ओर से जारी वर्क अप्रूवल में केवल फ्रंट बम्पर, लेफ्ट व्हील आर्च और लोअर ग्रिल को बदलने की अनुमति दी गई। वहीं वाहन के पिछले हिस्से में हुई क्षति, जिसमें बैक लाइट टूटना और स्क्रैच शामिल हैं, को दुर्घटना से संबंधित नहीं माना गया।

कमलाकर सिंह का कहना है कि दुर्घटना के समय उनकी गाड़ी पहले सामने से एक पेड़ से टकराई। टक्कर इतनी तेज थी कि वाहन अनियंत्रित होकर घूम गया और उसका पिछला हिस्सा सड़क किनारे मौजूद मजबूत पेड़ की टहनियों से टकरा गया। उन्होंने यह भी संभावना जताई कि उसी दौरान पीछे से गुजर रहे किसी अज्ञात वाहन के संपर्क में आने से भी पिछला हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ हो सकता है। उनके अनुसार, इसी घटना में बैक लाइट टूट गई और पीछे की बॉडी पर खरोंचें आ गईं।

उन्होंने अपने आवेदन में उल्लेख किया है कि दुर्घटना के तुरंत बाद वह मानसिक तनाव और घबराहट की स्थिति में थे, जिसके कारण मौके पर वाहन के पिछले हिस्से का नुकसान स्पष्ट रूप से नहीं देख पाए। बाद में जब उन्होंने शांत होकर वाहन का निरीक्षण किया, तब पीछे की क्षति का पता चला।

अपने दावे को मजबूत करने के लिए उपभोक्ता ने 23 जून 2026 को तैयार की गई व्हीकल कंडीशन रिपोर्ट (Vehicle Condition Report Form/Job Record) का भी हवाला दिया है। उनके अनुसार, इस रिपोर्ट में वाहन की ओडोमीटर रीडिंग 7760 किलोमीटर दर्ज है और वाहन के क्षतिग्रस्त हिस्सों का विवरण भी उपलब्ध है, जिससे यह संकेत मिलता है कि दुर्घटना का प्रभाव केवल आगे तक सीमित नहीं था।

इसी आधार पर कमलाकर सिंह ने बीमा कंपनी के संबंधित अधिकारियों और सर्वेक्षक को लिखित प्रार्थना पत्र भेजकर वाहन का दोबारा तकनीकी निरीक्षण कराने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि यदि री-इंस्पेक्शन निष्पक्ष तरीके से किया जाता है तो पीछे की क्षति भी उसी दुर्घटना से संबंधित पाई जाएगी और उसे बीमा क्लेम में शामिल किया जाना चाहिए।

उपभोक्ता ने यह भी स्पष्ट किया है कि उनकी मांग किसी अतिरिक्त लाभ की नहीं, बल्कि बीमा पॉलिसी के नियमों के अनुसार दुर्घटना से हुए वास्तविक नुकसान का उचित मूल्यांकन कराने की है।

फिलहाल इस मामले में एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि कंपनी री-इंस्पेक्शन के अनुरोध पर क्या निर्णय लेती है और तकनीकी जांच के बाद क्लेम में संशोधन किया जाता है या नहीं। यदि कंपनी अपना पक्ष जारी करती है, तो उसे भी समाचार में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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