Site icon हिट एंड हॉट न्यूज़

नाटो शिखर सम्मेलन 2026: जॉर्जिया मेलोनी ने रखा इटली का स्पष्ट रुख, रक्षा खर्च पर राष्ट्रीय हितों को दी सर्वोच्च प्राथमिकता

तुर्की की राजधानी अंकारा में 7–8 जुलाई 2026 को आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान इटली की प्रधानमंत्री ने रक्षा और सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने देश की स्पष्ट नीति सामने रखी। उन्होंने कहा कि इटली नाटो के प्रति अपनी सभी जिम्मेदारियों का सम्मान करेगा, लेकिन रक्षा बजट, निवेश और रणनीतिक प्राथमिकताओं का अंतिम निर्णय रोम ही करेगा। उनका संदेश यह था कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हर निवेश का लाभ इटली की अर्थव्यवस्था, उद्योगों और नागरिकों तक पहुँचना चाहिए।

राष्ट्रीय हितों के अनुरूप रक्षा निवेश

जॉर्जिया मेलोनी ने अपने संबोधन में कहा कि रक्षा क्षेत्र में किया जाने वाला निवेश केवल सैन्य क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। उनका मानना है कि ऐसे निवेश से इटली के विनिर्माण क्षेत्र, अनुसंधान संस्थानों, नई तकनीकों और रोजगार के अवसरों को भी मजबूती मिलनी चाहिए। इससे देश की सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।

उन्होंने संकेत दिया कि रक्षा खर्च को घरेलू उत्पादन और औद्योगिक विकास से जोड़ना इटली की दीर्घकालिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे विदेशी निर्भरता कम होगी और देश की आत्मनिर्भर क्षमता मजबूत होगी।

बदलती सुरक्षा चुनौतियों पर विशेष जोर

मेलोनी ने कहा कि वर्तमान समय में सुरक्षा की अवधारणा पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक हो गई है। अब केवल पारंपरिक सैन्य खतरों पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने साइबर हमलों, महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी प्रतिस्पर्धा और प्रवासन जैसी चुनौतियों को भी आधुनिक सुरक्षा का हिस्सा बताया।

उनके अनुसार, यदि किसी देश की डिजिटल व्यवस्था, आर्थिक नेटवर्क या आवश्यक आपूर्ति प्रणाली प्रभावित होती है, तो उसका असर सीधे नागरिकों के जीवन और राष्ट्रीय स्थिरता पर पड़ता है। इसलिए सुरक्षा नीति को इन सभी क्षेत्रों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाना चाहिए।

पश्चिमी सहयोग पर कायम रहने का संदेश

प्रधानमंत्री मेलोनी ने यह भी स्पष्ट किया कि इटली पश्चिमी देशों के बीच सहयोग और एकजुटता को महत्वपूर्ण मानता है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार का उद्देश्य सहयोगी देशों के साथ मजबूत संबंध बनाए रखना है। साथ ही उन्होंने अपने राजनीतिक निर्णयों का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें अपने किसी भी कदम पर पछतावा नहीं है और वे पश्चिमी साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

यूरोप की सामरिक क्षमता बढ़ाने की जरूरत

मेलोनी ने यूरोपीय देशों से आग्रह किया कि वे अपनी रक्षा और औद्योगिक क्षमता को मजबूत करें। उनका मानना है कि यदि यूरोप महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों, तकनीकों और आवश्यक संसाधनों के लिए बाहरी देशों पर अत्यधिक निर्भर रहेगा, तो भविष्य में रणनीतिक चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं।

उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यूरोप को अपनी उत्पादन क्षमता, अनुसंधान और रक्षा उद्योग में निवेश बढ़ाकर अधिक आत्मनिर्भर बनना चाहिए, ताकि बदलते वैश्विक माहौल में वह प्रभावी भूमिका निभा सके।

नाटो की भूमिका पर नया दृष्टिकोण

इटली की प्रधानमंत्री ने कहा कि आज नाटो की जिम्मेदारी केवल सदस्य देशों की सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं रह सकती। आधुनिक दौर में संगठन को साइबर सुरक्षा, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और नागरिकों के दैनिक जीवन से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा।

उनके अनुसार, बदलते वैश्विक परिदृश्य में नाटो को अपनी रणनीतियों और कार्यप्रणाली को समय के अनुरूप विकसित करना आवश्यक है।

इटली की नई रणनीतिक सोच

मेलोनी के वक्तव्य से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि इटली रक्षा नीति को केवल सुरक्षा के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि आर्थिक विकास, औद्योगिक प्रगति और तकनीकी आत्मनिर्भरता के साथ जोड़कर देख रहा है। सरकार का उद्देश्य ऐसा रक्षा निवेश करना है जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होने के साथ-साथ देश के उद्योगों, अनुसंधान संस्थानों और रोजगार को भी लाभ मिले।

निष्कर्ष

अंकारा में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान जॉर्जिया मेलोनी का रुख यह दर्शाता है कि इटली नाटो के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं को निभाने के लिए तैयार है, लेकिन वह अपनी रक्षा नीति का संचालन राष्ट्रीय हितों और आर्थिक प्राथमिकताओं के आधार पर करना चाहता है। उनका संदेश यह भी संकेत देता है कि भविष्य की सुरक्षा रणनीति में सैन्य शक्ति के साथ औद्योगिक क्षमता, तकनीकी नवाचार और आर्थिक आत्मनिर्भरता को समान महत्व दिया जाएगा। यही संतुलित दृष्टिकोण आने वाले वर्षों में इटली की रक्षा और विदेश नीति की दिशा तय कर सकता है।

Exit mobile version