
अमृतपाल सिंह बहराइच
संवाददाता हिट एंड हॉट न्यूज़
बहराइच। घाघरा नदी के किनारे बसे कैलाशपुरी क्षेत्र में नदी के कटान से ग्रामीणों को बचाने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया गया कटान रोधी बाँध पहली ही बारिश की परीक्षा में टिक नहीं सका। मानसून की शुरुआती बारिश और नदी के जलस्तर में मामूली बढ़ोतरी के साथ ही पूरी संरचना क्षतिग्रस्त होकर बह गई। इस घटना ने निर्माण की गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और सरकारी परियोजनाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पहली ही बरसात में खुली निर्माण की हकीकत
स्थानीय लोगों के अनुसार कटान रोकने के लिए जियो-बैग्स और अन्य सामग्री का उपयोग कर सुरक्षा संरचना तैयार की गई थी। उम्मीद थी कि यह बाँध नदी के तेज बहाव को नियंत्रित कर आसपास के गांवों को सुरक्षित रखेगा। लेकिन बारिश शुरू होते ही यह व्यवस्था धराशायी हो गई। देखते ही देखते नदी का तेज बहाव पूरी संरचना को अपने साथ बहा ले गया और करोड़ों रुपये की परियोजना बेअसर साबित हुई।
ग्रामीणों में नाराज़गी और चिंता
बाँध टूटने के बाद क्षेत्र के लोगों में गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता से समझौता किया गया और समय-समय पर तकनीकी निगरानी भी नहीं की गई। उनका कहना है कि यदि निर्माण मानकों का सही तरीके से पालन किया गया होता तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
ग्रामीणों को अब सबसे अधिक चिंता अपने घरों, खेती और भविष्य की है। उनका कहना है कि यदि नदी का बहाव इसी तरह बना रहा तो आसपास के कई गांव कटान की चपेट में आ सकते हैं।
कई गांवों पर मंडरा रहा खतरा
स्थानीय लोगों का मानना है कि बरखड़िया, चाहलुआ, सुजौली और जंगलबिछिया जैसे निचले इलाकों में कटान का खतरा तेजी से बढ़ सकता है। यदि समय रहते प्रभावी सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो बड़ी संख्या में परिवारों को अपना घर छोड़ने की नौबत आ सकती है। खेतों के नदी में समाने का भी खतरा लगातार बढ़ रहा है, जिससे ग्रामीणों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।
मानसून के साथ बढ़ सकती है चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून का शुरुआती दौर अभी बाकी है और आने वाले दिनों में घाघरा नदी का जलस्तर और बढ़ सकता है। ऐसे में यदि कटान रोकने के लिए तत्काल मजबूत व्यवस्था नहीं की गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। इससे न केवल जन-धन की हानि होगी बल्कि सरकारी संसाधनों पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने प्रशासन और सिंचाई विभाग से तत्काल प्रभावी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि प्रभावित स्थल का तकनीकी निरीक्षण कराया जाए, अस्थायी मरम्मत के बजाय स्थायी और मजबूत कटान रोधी व्यवस्था बनाई जाए तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर निर्माण में यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
जवाबदेही का बड़ा सवाल
कैलाशपुरी क्षेत्र की यह घटना केवल एक बाँध के टूटने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक धन के उपयोग, निर्माण गुणवत्ता और परियोजनाओं की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि कोई सुरक्षा संरचना पहली ही बारिश में ध्वस्त हो जाए, तो उसकी गुणवत्ता और कार्यप्रणाली की निष्पक्ष समीक्षा आवश्यक हो जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ऐसी स्थायी सुरक्षा व्यवस्था चाहिए जो हर वर्ष आने वाले मानसून के दौरान उनके घरों, खेतों और भविष्य की रक्षा कर सके। अब सभी की निगाहें प्रशासन और संबंधित विभागों की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।
