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यूक्रेनी कला को नई पहचान देने की पहल ‘तिस्याचोवेस्ना’, 1,227 परियोजनाएं अंतिम चरण में; युद्धकाल में संस्कृति को मजबूत करने का संकल्प

वानो-फ्रैंकिव्स्क। यूक्रेन में जारी युद्ध के बीच संस्कृति और कला को राष्ट्रीय शक्ति के रूप में मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। राष्ट्रीय सांस्कृतिक पहल ‘तिस्याचोवेस्ना’ (Tysiachovesna) के तहत 1,227 रचनात्मक परियोजनाएं चयन प्रक्रिया के अंतिम चरण तक पहुंच गई हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने 13 अगस्त 2026 को इवानो-फ्रैंकिव्स्क में इस पहल के अंतिम चयन चरण में भाग लिया और कलाकारों, विशेषज्ञों तथा परियोजना से जुड़े लोगों से बातचीत की।

यह पहल केवल कलाकारों को आर्थिक सहायता देने की योजना के रूप में नहीं देखी जा रही, बल्कि इसका उद्देश्य यूक्रेनी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करना, नई रचनात्मक प्रतिभाओं को अवसर देना और देश की कहानियों को घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना है।

तीन हजार से अधिक आवेदनों में से 1,227 परियोजनाएं अंतिम चरण में

‘तिस्याचोवेस्ना’ के लिए तीन हजार से अधिक रचनात्मक आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से चयन प्रक्रिया के विभिन्न चरणों से गुजरने के बाद 1,227 परियोजनाएं अंतिम चरण में पहुंची हैं। इतनी बड़ी संख्या में परियोजनाओं का अंतिम चरण तक पहुंचना यूक्रेन के रचनात्मक क्षेत्र में मौजूद व्यापक प्रतिभा और सक्रियता को दर्शाता है।

12 से 16 अगस्त 2026 के बीच परियोजनाओं की सार्वजनिक प्रस्तुतियां और अंतिम मूल्यांकन किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में विशेषज्ञों और चयन समितियों के सामने प्रतिभागी अपने विचार तथा परियोजनाओं की योजनाएं प्रस्तुत कर रहे हैं।

अंतिम विजेताओं की घोषणा 16 अगस्त को किए जाने की जानकारी सामने आई है। चयनित परियोजनाओं को राज्य की ओर से वित्तीय सहायता मिलने की संभावना है।

सात प्रमुख क्षेत्रों में रचनात्मक परियोजनाएं

‘तिस्याचोवेस्ना’ का दायरा व्यापक रखा गया है। इसमें यूक्रेनी सांस्कृतिक उत्पाद तैयार करने वाले विभिन्न रचनात्मक क्षेत्रों को शामिल किया गया है। कार्यक्रम के अंतर्गत फिल्म, डॉक्यूमेंट्री, संगीत, प्रदर्शनकारी कला और दृश्य कला सहित कई क्षेत्रों में परियोजनाओं को समर्थन देने का प्रावधान है।

इसका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि संस्कृति केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहती। फिल्म, संगीत, थिएटर, साहित्य और कला किसी देश की सामाजिक स्मृति, इतिहास और पहचान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का माध्यम बनते हैं।

युद्ध के दौर में यह भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। जब किसी समाज को लगातार संकट और अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है, तब कला लोगों को अपनी पहचान, भाषा, इतिहास और सामूहिक अनुभवों से जोड़ने का काम कर सकती है।

संस्कृति को आर्थिक गतिविधि से जोड़ने पर जोर

राष्ट्रपति जेलेंस्की ने इस पहल के आर्थिक महत्व की ओर भी ध्यान दिलाया। उनके अनुसार सांस्कृतिक परियोजनाओं का प्रभाव केवल कला जगत तक सीमित नहीं रहता। इससे रचनात्मक टीमों को काम मिलता है, सांस्कृतिक प्रबंधन विकसित होता है, उत्पादन और आधारभूत ढांचे को बढ़ावा मिलता है तथा कला शिक्षा के लिए नए अवसर पैदा होते

इस दृष्टिकोण से देखा जाए तो ‘तिस्याचोवेस्ना’ एक प्रकार से रचनात्मक अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास भी है। किसी फिल्म के निर्माण से लेकर संगीत कार्यक्रम, थिएटर प्रस्तुति या दृश्य कला परियोजना तक कई लोगों को रोजगार और व्यावसायिक अवसर मिल सकते हैं।

इससे कलाकारों के साथ-साथ निर्माता, तकनीकी विशेषज्ञ, डिजाइनर, लेखक, संगीतकार, प्रबंधक और अन्य रचनात्मक पेशेवर भी लाभान्वित हो सकते हैं।

युद्धकाल में संस्कृति क्यों है महत्वपूर्ण?

यूक्रेन लंबे समय से युद्ध का सामना कर रहा है। ऐसे वातावरण में सरकार के लिए रक्षा, अर्थव्यवस्था, ऊर्जा और मानवीय सहायता जैसी प्राथमिकताएं स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण हैं। इसके बावजूद संस्कृति को समर्थन देना इस बात का संकेत है कि राष्ट्रीय पुनर्निर्माण केवल भौतिक ढांचे के निर्माण तक सीमित नहीं है।

किसी देश की पहचान उसके शहरों और इमारतों के साथ-साथ उसकी भाषा, कला, संगीत, साहित्य, लोक परंपराओं और सामूहिक स्मृतियों से भी बनती है।

इसी कारण ‘तिस्याचोवेस्ना’ जैसी पहल युद्ध के बीच सांस्कृतिक निरंतरता बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखी जा सकती है। इसका लक्ष्य ऐसी नई रचनाओं को बढ़ावा देना है जो वर्तमान यूक्रेनी अनुभवों को दर्ज कर सकें और देश की सांस्कृतिक आवाज को दुनिया तक पहुंचा सकें।

युवाओं और नई प्रतिभाओं के लिए अवसर

इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू नई प्रतिभाओं को मंच देना भी है। बड़ी संख्या में परियोजनाओं का सामने आना बताता है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद यूक्रेन में कलाकार और रचनात्मक युवा नए विचारों पर काम कर रहे हैं।

सरकारी सहायता मिलने से ऐसे कलाकारों को उन परियोजनाओं को पूरा करने का अवसर मिल सकता है, जिन्हें संसाधनों की कमी के कारण शुरू करना या आगे बढ़ाना कठिन होता।

विशेष रूप से नई पीढ़ी के रचनाकारों के लिए यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी भी देश का सांस्कृतिक भविष्य केवल स्थापित कलाकारों से नहीं, बल्कि नए प्रयोग करने वाले युवाओं से भी तैयार होता है।

4 अरब रिव्निया की बड़ी पहल

‘तिस्याचोवेस्ना’ के लिए 2026 में लगभग 4 अरब यूक्रेनी रिव्निया का प्रावधान किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह यूक्रेनी सांस्कृतिक उत्पादों के समर्थन की सबसे बड़ी राज्य पहलों में से एक है।

कार्यक्रम की संरचना में परियोजनाओं के लिए अलग-अलग स्तर की वित्तीय सहायता का प्रावधान है। कुछ श्रेणियों, विशेष रूप से बच्चों के लिए बनाई जाने वाली परियोजनाओं और डेब्यू परियोजनाओं के लिए पूर्ण वित्तपोषण की संभावना रखी गई है, जबकि अन्य परियोजनाओं के लिए आंशिक राज्य सहायता और सह-वित्तपोषण की व्यवस्था है।

इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार केवल तैयार कला उत्पादों को समर्थन देने के बजाय नए सांस्कृतिक उत्पादन की पूरी प्रक्रिया को प्रोत्साहित करना चाहती है।

हर साल आयोजित करने की योजना

इस पहल की सबसे महत्वपूर्ण घोषणाओं में से एक यह है कि ‘तिस्याचोवेस्ना’ को हर साल आयोजित किया जाएगा। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में इस कार्यक्रम का विस्तार किया जाएगा, जिसमें नई श्रेणियां, नए प्रतिभागी और अधिक बजट शामिल हो सकते हैं।

यदि यह योजना लगातार लागू होती है तो इससे यूक्रेन में सांस्कृतिक परियोजनाओं के लिए एक स्थायी वित्तीय और संस्थागत ढांचा तैयार हो सकता है।

आने वाले समय में कार्यक्रम का विस्तार ऑनलाइन गेम, प्रिंट और ऑडियोबुक, साहित्यिक उत्सवों और मेलों जैसे क्षेत्रों तक करने की योजना की भी जानकारी सामने आई है।

दुनिया तक पहुंचेगी यूक्रेन की कहानी

‘तिस्याचोवेस्ना’ का एक बड़ा उद्देश्य यूक्रेनी सांस्कृतिक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाना भी माना जा रहा है। किसी देश की अंतरराष्ट्रीय पहचान केवल राजनीतिक बयानों से नहीं बनती। फिल्म, संगीत, साहित्य और कला भी दुनिया के सामने किसी समाज की वास्तविक कहानी प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

यूक्रेनी कलाकारों की नई रचनाएं युद्ध, सामाजिक बदलाव, मानवीय अनुभव, इतिहास और भविष्य की आकांक्षाओं को अलग-अलग दृष्टिकोणों से सामने ला सकती हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को यूक्रेन को केवल युद्ध की खबरों के माध्यम से नहीं, बल्कि उसकी संस्कृति और रचनात्मकता के माध्यम से समझने का अवसर मिल सकता है।

निष्कर्ष

‘तिस्याचोवेस्ना’ यूक्रेन के लिए केवल एक सांस्कृतिक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि कला, पहचान, रचनात्मक अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय आत्मविश्वास को मजबूत करने की व्यापक पहल बनती दिखाई दे रही है। 1,227 परियोजनाओं का अंतिम चरण तक पहुंचना इस बात का संकेत है कि युद्धकाल की कठिन परिस्थितियों के बावजूद यूक्रेन का रचनात्मक क्षेत्र सक्रिय है।

अब इस पहल की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि चयनित परियोजनाएं किस स्तर की सांस्कृतिक सामग्री तैयार करती हैं, उन्हें यूक्रेनी दर्शकों से कैसी प्रतिक्रिया मिलती है और वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर यूक्रेन की सांस्कृतिक आवाज को कितना मजबूत करती हैं।

यदि ‘तिस्याचोवेस्ना’ लगातार नए कलाकारों को अवसर देती रही और हर वर्ष इसका दायरा बढ़ता गया, तो यह यूक्रेन के सांस्कृतिक पुनर्निर्माण की एक महत्वपूर्ण आधारशिला साबित हो सकती है। युद्ध की परिस्थितियों के बीच संस्कृति को जीवित रखना और नई रचनात्मक ऊर्जा को प्रोत्साहित करना किसी भी समाज के दीर्घकालीन भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

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