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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सेंट्रल ट्राइबल यूनिवर्सिटी के प्रथम दीक्षांत समारोह में बढ़ाया गौरव, 373 विद्यार्थियों को मिली डिग्री

आंध्र प्रदेश: भारत की राष्ट्रपति ने मंगलवार को आंध्र प्रदेश स्थित के पहले दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। यह अवसर विश्वविद्यालय के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हुआ, क्योंकि स्थापना के लगभग सात वर्ष बाद पहली बार विद्यार्थियों को औपचारिक रूप से डिग्रियां प्रदान की गईं। समारोह में 373 विद्यार्थियों को डिग्री दी गई, जबकि उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 13 छात्रों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।

शिक्षा और जनजातीय सशक्तिकरण की नई शुरुआत

अपने पहले दीक्षांत समारोह के माध्यम से विश्वविद्यालय ने शिक्षा के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि दर्ज की है। यह संस्थान विशेष रूप से जनजातीय समुदायों के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था। आज यह विश्वविद्यालय स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध स्तर के विभिन्न पाठ्यक्रम संचालित कर रहा है, जिनमें जनजातीय अध्ययन, संस्कृति संरक्षण, सामाजिक विकास और सतत विकास जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

कई गणमान्य हस्तियों की रही उपस्थिति

समारोह में केंद्रीय शिक्षा मंत्री , तथा आंध्र प्रदेश के शिक्षा मंत्री भी मौजूद रहे। सभी अतिथियों ने विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का सबसे प्रभावी माध्यम बताया।

जनजातीय छात्रों की बढ़ती भागीदारी

विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक यह है कि यहां बड़ी संख्या में जनजातीय समुदायों के छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। कुल विद्यार्थियों में लगभग 20 से 28 प्रतिशत छात्र जनजातीय पृष्ठभूमि से आते हैं। संस्थान का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि इन समुदायों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना भी है।

आधुनिक परिसर और भविष्य की योजनाएं

विश्वविद्यालय का स्थायी परिसर तेजी से विकसित किया जा रहा है। निर्माण कार्य का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा पूरा हो चुका है और उम्मीद है कि दिसंबर 2026 तक पूरा विश्वविद्यालय नए परिसर में स्थानांतरित हो जाएगा। नए परिसर में आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं, शोध प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय और छात्रावास जैसी व्यवस्थाएं उपलब्ध होंगी।

परंपरा और आधुनिकता का संगम

सेंट्रल ट्राइबल यूनिवर्सिटी शिक्षा के साथ-साथ जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण पर भी विशेष बल देती है। विश्वविद्यालय जैविक खेती, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास जैसी आधुनिक तकनीकों को जनजातीय समाज तक पहुंचाने के लिए भी निरंतर कार्य कर रहा है, ताकि विकास और सांस्कृतिक विरासत दोनों साथ-साथ आगे बढ़ सकें।

निष्कर्ष

सेंट्रल ट्राइबल यूनिवर्सिटी का पहला दीक्षांत समारोह केवल डिग्री वितरण का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह जनजातीय शिक्षा, समावेशी विकास और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर भी साबित हुआ। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की गरिमामयी उपस्थिति ने इस आयोजन को राष्ट्रीय महत्व प्रदान किया और विद्यार्थियों के लिए यह दिन जीवनभर यादगार बन गया।

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