
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन द्वारा विभिन्न संसदीय समितियों के गठन और सदस्यों के नामांकन से संबंधित महत्वपूर्ण प्रस्ताव सदन में प्रस्तुत किए गए। सदन ने इन सभी प्रस्तावों को ध्वनिमत से स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही संसद की तीन महत्वपूर्ण समितियों—लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee – PAC), लोक उपक्रम समिति (Committee on Public Undertakings – COPU) तथा अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण समिति (Committee on Welfare of Other Backward Classes) के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ गई।
ये समितियां भारतीय संसदीय व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं और सरकार की कार्यप्रणाली, सार्वजनिक धन के उपयोग, सार्वजनिक उपक्रमों के प्रदर्शन तथा सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर निगरानी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
डॉ. एल. मुरुगन ने पेश किए महत्वपूर्ण प्रस्ताव
संसद में केंद्रीय मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने तीन अलग-अलग प्रस्ताव प्रस्तुत किए। इनमें—
- लोक लेखा समिति (PAC) में एक सदस्य के नामांकन का प्रस्ताव।
- लोक उपक्रम समिति (COPU) में एक सदस्य के नामांकन का प्रस्ताव।
- अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण समिति में 10 सदस्यों के निर्वाचन का प्रस्ताव।
सदन ने इन सभी प्रस्तावों पर सहमति व्यक्त करते हुए उन्हें पारित कर दिया। इससे संबंधित समितियों का पुनर्गठन और कार्य संचालन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ेगा।
संसदीय समितियां क्यों होती हैं महत्वपूर्ण?
भारतीय संसद में समितियों की व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि संसद के सीमित समय में भी विभिन्न विषयों की गहराई से जांच और समीक्षा की जा सके। समितियां विस्तृत अध्ययन करती हैं, विशेषज्ञों की राय लेती हैं और अपनी रिपोर्ट संसद के समक्ष प्रस्तुत करती हैं।
इन समितियों के माध्यम से सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित होती है तथा प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने में मदद मिलती है।
लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee) की भूमिका
लोक लेखा समिति संसद की सबसे प्रभावशाली वित्तीय समितियों में से एक मानी जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि सरकार द्वारा संसद से स्वीकृत धन का उपयोग निर्धारित नियमों और उद्देश्यों के अनुरूप किया गया है या नहीं।
यह समिति विशेष रूप से निम्नलिखित कार्य करती है—
- नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्टों की जांच।
- सरकारी खर्चों का परीक्षण।
- सार्वजनिक धन के दुरुपयोग या अनियमितताओं की समीक्षा।
- वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए सरकार को सुझाव देना।
लोक लेखा समिति की रिपोर्टें अक्सर प्रशासनिक सुधारों और वित्तीय पारदर्शिता को मजबूत करने का आधार बनती हैं।
लोक उपक्रम समिति (Committee on Public Undertakings) का महत्व
लोक उपक्रम समिति का कार्य सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) के प्रदर्शन और कार्यप्रणाली की समीक्षा करना होता है।
यह समिति निम्नलिखित पहलुओं पर ध्यान देती है—
- सार्वजनिक उपक्रमों की कार्यकुशलता।
- वित्तीय प्रदर्शन।
- प्रबंधन व्यवस्था।
- संसाधनों का प्रभावी उपयोग।
- CAG द्वारा सार्वजनिक उपक्रमों पर दी गई टिप्पणियों की समीक्षा।
समिति यह सुनिश्चित करने का प्रयास करती है कि सरकारी कंपनियां पारदर्शी, लाभकारी और जनहित के अनुरूप कार्य करें।
अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण समिति का उद्देश्य
संसद की अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) कल्याण समिति सामाजिक न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
इस समिति का मुख्य उद्देश्य है—
- अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित सरकारी योजनाओं की समीक्षा।
- कल्याणकारी कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की निगरानी।
- शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सशक्तिकरण से जुड़े मुद्दों का अध्ययन।
- OBC समुदाय से संबंधित नीतियों के प्रभाव का मूल्यांकन।
- सरकार को आवश्यक सुधारों के संबंध में सुझाव देना।
समिति यह सुनिश्चित करने का प्रयास करती है कि पिछड़े वर्गों के लिए बनाई गई योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र लाभार्थियों तक पहुंचे।
संसदीय समितियों की कार्यप्रणाली
संसदीय समितियां सामान्यतः सदन की कार्यवाही से अलग बैठकों का आयोजन करती हैं। इनमें विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद शामिल होते हैं, जिससे निष्पक्ष और व्यापक विचार-विमर्श संभव हो पाता है।
समितियां—
- मंत्रालयों से जानकारी मांग सकती हैं।
- अधिकारियों को बुलाकर स्पष्टीकरण प्राप्त कर सकती हैं।
- विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों की राय सुन सकती हैं।
- अध्ययन के बाद विस्तृत रिपोर्ट संसद में प्रस्तुत करती हैं।
इन रिपोर्टों के आधार पर सरकार कई बार अपनी नीतियों और प्रक्रियाओं में सुधार भी करती है।
लोकतंत्र को मजबूत बनाती हैं संसदीय समितियां
भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में संसद का कार्य केवल कानून बनाना ही नहीं है, बल्कि सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करना भी है। संसदीय समितियां इसी उद्देश्य को प्रभावी ढंग से पूरा करती हैं।
इन समितियों के माध्यम से—
- सरकारी योजनाओं की निगरानी होती है।
- सार्वजनिक धन के उपयोग पर नजर रखी जाती है।
- प्रशासनिक कमियों की पहचान होती है।
- सुधारात्मक सुझाव दिए जाते हैं।
- लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता मजबूत होती है।
इसी कारण इन्हें संसद की “मिनी संसद” भी कहा जाता है, क्योंकि यहां विषयों पर विस्तृत और तकनीकी स्तर पर चर्चा होती है।
सभी प्रस्तावों का पारित होना क्यों महत्वपूर्ण है?
डॉ. एल. मुरुगन द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों का सदन द्वारा पारित किया जाना यह सुनिश्चित करता है कि संबंधित समितियां समय पर अपना कार्य प्रारंभ कर सकें।
संसदीय समितियों का नियमित गठन आवश्यक है क्योंकि—
- वित्तीय निगरानी का कार्य निरंतर चलता रहे।
- सार्वजनिक उपक्रमों की समीक्षा समय पर हो।
- सामाजिक न्याय से जुड़े विषयों पर संसद की निगरानी बनी रहे।
- विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की कार्यप्रणाली का मूल्यांकन जारी रहे।
समितियों के सक्रिय रहने से संसद की निगरानी क्षमता और अधिक प्रभावी होती है।
पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
लोक लेखा समिति, लोक उपक्रम समिति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण समिति जैसी संसदीय समितियां शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। इन समितियों के माध्यम से संसद सरकार के कार्यों की गहन समीक्षा करती है और आवश्यक सुधारों की दिशा में सुझाव देती है।
डॉ. एल. मुरुगन द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों को सदन की स्वीकृति मिलना संसदीय प्रक्रियाओं की निरंतरता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती का संकेत है। यह कदम न केवल संसदीय कार्यों को सुचारु रूप से आगे बढ़ाने में सहायक होगा, बल्कि सार्वजनिक धन के प्रभावी उपयोग, सार्वजनिक उपक्रमों की जवाबदेही तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के कल्याण से संबंधित नीतियों की निगरानी को भी और अधिक सुदृढ़ करेगा। आने वाले समय में इन समितियों की रिपोर्टें शासन व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
