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होर्मुज को लेकर अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा, व्हाइट हाउस ने अमेरिकी नौसेना के नियंत्रण का किया दावा

वॉशिंगटन। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चिंता का बड़ा कारण बन गया है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल इस जलडमरूमध्य को लेकर दोनों देशों के दावे एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत हैं। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि अमेरिकी नौसेना ने समुद्री मार्ग को सुरक्षित बनाने और वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही बहाल करने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है, जबकि ईरान का कहना है कि जलडमरूमध्य पर उसका नियंत्रण बना हुआ है और अमेरिकी दावे वास्तविक स्थिति को छिपाने की कोशिश हैं।

हालिया घटनाक्रम में व्हाइट हाउस ने दावा किया है कि अमेरिकी सेनाओं ने होर्मुज जलडमरूमध्य के अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों से ईरानी समुद्री खदानों को हटाने का काम पूरा कर लिया है। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार करीब 1,500 वाणिज्यिक जहाज अमेरिकी सुरक्षा के तहत इस मार्ग से गुजर चुके हैं और इनके जरिए लगभग 750 मिलियन बैरल कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचा है। व्हाइट हाउस ने यह भी कहा है कि जुलाई में अमेरिकी नाकाबंदी दोबारा शुरू होने के बाद ईरान अपने तटों से तेल निर्यात नहीं कर पाया है।

अमेरिकी प्रशासन का बड़ा दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और व्हाइट हाउस लगातार यह दावा कर रहे हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नौसेना का प्रभाव निर्णायक हो गया है। व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि अमेरिकी सेना ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग को साफ करने के साथ-साथ व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी का उद्देश्य केवल सैन्य दबाव बनाना नहीं बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को जारी रखना भी है। वाशिंगटन का तर्क है कि यदि होर्मुज के रास्ते तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों का परिवहन बाधित होता है तो इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एशिया, यूरोप और दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी ऊर्जा कीमतों तथा महंगाई पर पड़ सकता है।

व्हाइट हाउस ने अपने दावे के समर्थन में यह भी कहा है कि लगभग 75 ऐसे जहाजों को वापस लौटाया गया, जिन्होंने अमेरिकी नाकाबंदी को तोड़ने की कोशिश की। प्रशासन के मुताबिक खाड़ी क्षेत्र से होने वाला तेल निर्यात अब युद्ध से पहले के स्तर के लगभग दो-तिहाई तक पहुंच चुका है और इसमें धीरे-धीरे वृद्धि हो रही है।

ईरान ने अमेरिकी दावों को खारिज किया

दूसरी ओर ईरान ने अमेरिका के इन दावों को स्वीकार नहीं किया है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की नौसेना ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका नियंत्रण कायम है। ईरानी पक्ष ने अमेरिकी दावों को तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय धारणा को प्रभावित करने की कोशिश बताया है।

ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई समाप्त नहीं करता और उससे जुड़े समझौतों एवं मांगों पर आगे नहीं बढ़ता, तब तक जलडमरूमध्य में सामान्य समुद्री यातायात बहाल करने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकती। ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका पर आर्थिक और सैन्य दबाव के जरिए समुद्री मार्ग पर अपना प्रभाव बढ़ाने का आरोप लगाया है।

यही वजह है कि वर्तमान स्थिति को केवल इस सवाल से नहीं समझा जा सकता कि जलडमरूमध्य खुला है या बंद। असली विवाद इस बात पर है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था तय करने का वास्तविक प्रभाव किस पक्ष के पास है।

होर्मुज क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है। इसके आसपास दुनिया के प्रमुख तेल और गैस उत्पादक देश स्थित हैं। युद्ध से पहले इस मार्ग से वैश्विक तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस के लगभग पांचवें हिस्से के बराबर ऊर्जा व्यापार गुजरता था। इसलिए यहां लंबे समय तक व्यवधान पैदा होने पर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर बड़ा दबाव पड़ सकता है।

ऊर्जा के अलावा यह समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है। खाड़ी देशों से एशिया और यूरोप की ओर जाने वाले अनेक जहाज इसी क्षेत्र से गुजरते हैं। ऐसे में सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बढ़ने पर जहाज कंपनियां वैकल्पिक मार्गों, अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था और लंबी यात्रा जैसे विकल्पों पर विचार करने के लिए मजबूर हो सकती हैं।

इसका सीधा असर परिवहन लागत, बीमा खर्च और ऊर्जा की कीमतों पर पड़ सकता है। अगर लंबे समय तक जहाजों की आवाजाही बाधित होती है तो इसका प्रभाव पेट्रोलियम उत्पादों से लेकर औद्योगिक उत्पादन और महंगाई तक दिखाई दे सकता है।

अमेरिका की नौसैनिक भूमिका क्यों बढ़ी?

अमेरिकी प्रशासन ने पिछले महीनों में होर्मुज क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति का इस्तेमाल समुद्री यातायात को सुरक्षित करने के लिए किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार अमेरिकी बलों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए समुद्री वाणिज्य को बहाल करने की दिशा में काम किया है। कमांड के मुताबिक अमेरिकी सैन्य संसाधनों की मदद से व्यापारिक जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया।

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि समुद्री खतरों को कम करने के लिए निगरानी, सुरक्षा और समुद्री मार्गों की जांच जैसे कदम उठाए गए। इसी क्रम में अमेरिकी प्रशासन ने समुद्री खदानों को हटाने की कार्रवाई को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में पेश किया है।

हालांकि, समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों की नजर में किसी भी मार्ग को सुरक्षित घोषित करने के बावजूद जोखिम पूरी तरह समाप्त मानना उचित नहीं है। हाल में एक टैंकर के पास हुए हमले की घटना ने भी यह दिखाया कि क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों के लिए सुरक्षा संबंधी चिंताएं अभी समाप्त नहीं हुई हैं।

ईरान के लिए होर्मुज क्यों महत्वपूर्ण है?

ईरान के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य केवल एक समुद्री मार्ग नहीं बल्कि रणनीतिक दबाव का महत्वपूर्ण साधन है। क्षेत्र में ईरान की भौगोलिक स्थिति उसे समुद्री यातायात पर प्रभाव डालने की क्षमता देती है। यही कारण है कि अमेरिका और ईरान के बीच व्यापक विवाद के बीच यह जलडमरूमध्य बातचीत और दबाव की राजनीति का केंद्रीय मुद्दा बन गया है।

ईरान की अर्थव्यवस्था पर अमेरिकी प्रतिबंधों और युद्ध के प्रभाव के बीच समुद्री मार्ग की स्थिति और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार ईरान का विदेशी व्यापार काफी कम हुआ है और देश में महंगाई का दबाव भी बढ़ा है। ऐसे माहौल में तेल निर्यात और समुद्री व्यापार को लेकर विवाद तेहरान के लिए आर्थिक रूप से बेहद संवेदनशील मुद्दा बन गया है।

बातचीत की कोशिशें भी जारी

तनाव के बावजूद कूटनीतिक प्रयास पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। ईरान और ओमान के बीच समुद्री मार्ग को दोबारा खोलने के लिए एक संभावित व्यवस्था पर चर्चा हुई है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार प्रस्तावित व्यवस्था में दोनों देशों के जलक्षेत्र से गुजरने वाले एक निर्धारित समुद्री गलियारे की बात सामने आई है। हालांकि, इसके लिए अमेरिका की कुछ मांगों और ईरान की शर्तों को लेकर मतभेद अभी बने हुए हैं।

कतर और पाकिस्तान सहित कुछ देश भी अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने तथा समुद्री यातायात को सामान्य बनाने के लिए कूटनीतिक प्रयासों में भूमिका निभा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह चिंता बनी हुई है कि यदि बातचीत सफल नहीं होती और समुद्री तनाव बढ़ता है तो इसका असर क्षेत्रीय स्थिरता के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार पर नजर

होर्मुज संकट का सबसे बड़ा प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ने की आशंका है। तेल की कीमतों में किसी भी बड़े उतार-चढ़ाव का असर उन देशों पर अधिक पड़ सकता है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं।

भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई देशों के लिए खाड़ी क्षेत्र की ऊर्जा आपूर्ति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इसलिए समुद्री यातायात में लंबे समय तक अनिश्चितता रहने पर एशियाई अर्थव्यवस्थाओं को भी अतिरिक्त लागत का सामना करना पड़ सकता है।

हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि संकट किस दिशा में जाएगा। अमेरिका का कहना है कि समुद्री मार्ग में आवाजाही बहाल हो रही है, जबकि ईरान लगातार अपने नियंत्रण का दावा कर रहा है। इस विरोधाभास के बीच वास्तविक स्थिति लगातार बदल रही है।

आगे क्या हो सकता है?

आने वाले दिनों में तीन संभावनाएं सबसे महत्वपूर्ण मानी जा सकती हैं। पहली, अमेरिका और ईरान के बीच किसी नए समझौते के जरिए समुद्री यातायात को अधिक स्थिर किया जाए। दूसरी, दोनों पक्षों के बीच मौजूदा सैन्य और आर्थिक दबाव जारी रहे, जिससे होर्मुज की स्थिति लंबे समय तक अनिश्चित बनी रहे। तीसरी और सबसे चिंताजनक संभावना यह है कि किसी समुद्री घटना के कारण दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ जाए।

फिलहाल अमेरिका अपने नौसैनिक प्रभाव और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को अपनी सफलता के प्रमाण के रूप में पेश कर रहा है। दूसरी ओर ईरान अमेरिकी दावों को चुनौती देते हुए जलडमरूमध्य पर अपने अधिकार और प्रभाव को बनाए रखने की बात कर रहा है।

निष्कर्ष

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच जारी विवाद अब केवल दो देशों का सैन्य या राजनीतिक टकराव नहीं रह गया है। इसका सीधा संबंध वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार, तेल की कीमतों और मध्य पूर्व की सुरक्षा से है।

व्हाइट हाउस का दावा है कि अमेरिकी नौसेना ने समुद्री मार्ग को सुरक्षित करने और वाणिज्यिक यातायात को आगे बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभाई है। वहीं ईरान इन दावों को खारिज करते हुए जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बनाए रखने की बात कह रहा है।

ऐसे में आने वाले दिनों में कूटनीति की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। यदि दोनों पक्ष समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक जहाजों की निर्बाध आवाजाही को लेकर किसी समझौते पर पहुंचते हैं तो वैश्विक बाजारों को राहत मिल सकती है। लेकिन यदि तनाव और बढ़ा, तो होर्मुज संकट का प्रभाव मध्य पूर्व से बाहर निकलकर पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था तक पहुंच सकता है।

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