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🌾 खेतों में समृद्धि की नई इबारत: ICAR की ‘IISR प्रगति’ हल्दी बनी किसानों की ताकत, आधुनिक तकनीक से देश को ₹354 करोड़ का ऐतिहासिक लाभ!

भारत की कृषि व्यवस्था लगातार आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक अनुसंधान के दम पर नई ऊंचाइयों को छू रही है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जब विज्ञान और खेती का संगम होता है, तो खेतों में केवल फसल ही नहीं बल्कि समृद्धि भी लहलहाती है। भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान (IISR) द्वारा विकसित उन्नत हल्दी किस्म ‘IISR प्रगति’ और आधुनिक पोषण तकनीकों ने किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ देश की कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बनाया है।

ICAR द्वारा साझा किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ‘IISR प्रगति’ हल्दी की किस्म अब देश के 9 राज्यों में सफलतापूर्वक अपनाई जा चुकी है। इसके व्यापक प्रसार के लिए अब तक 7 टेक्नोलॉजी लाइसेंस जारी किए गए हैं। इस उन्नत किस्म और वैज्ञानिक खेती की बदौलत देश को अनुमानित ₹354 करोड़ का आर्थिक लाभ (Economic Surplus) प्राप्त हो रहा है, जो भारतीय कृषि अनुसंधान की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

इस सफलता के पीछे केवल नई किस्म ही नहीं, बल्कि Customized Foliar Nutrient Formulations जैसी आधुनिक तकनीक भी अहम भूमिका निभा रही है। इस तकनीक के माध्यम से पौधों को सीधे पत्तियों के जरिए आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे पोषण की दक्षता बढ़ती है और फसल का विकास तेज़ होता है। इसके परिणामस्वरूप किसानों को 15 प्रतिशत तक अधिक उत्पादन और 25 प्रतिशत तक अधिक शुद्ध आय प्राप्त हो रही है।

ICAR का यह मॉडल केवल नई तकनीक विकसित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर भी आधारित है। “Research → Adoption → Productivity → Prosperity” यानी अनुसंधान से अपनाने, उत्पादकता बढ़ाने और अंततः समृद्धि तक पहुंचने की यह पूरी प्रक्रिया भारतीय कृषि को नई दिशा दे रही है। इससे किसानों को बेहतर पोषक तत्व प्रबंधन, मजबूत फसल वृद्धि, अधिक पैदावार और बेहतर लाभ सुनिश्चित हो रहा है।

पिछले 12 वर्षों में कृषि अनुसंधान, नवाचार और किसान-केंद्रित तकनीकों पर लगातार हुए निवेश का परिणाम आज पूरे देश के सामने दिखाई दे रहा है। पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर किसान अब वैज्ञानिक और लाभकारी खेती की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। आधुनिक तकनीक, उन्नत बीज और बेहतर पोषण प्रबंधन भारतीय कृषि को आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

ICAR की यह उपलब्धि केवल एक नई हल्दी किस्म की सफलता नहीं, बल्कि यह उस बदलते भारत की कहानी है जहाँ विज्ञान किसानों के हाथों की ताकत बनकर खेतों में नई उम्मीद, अधिक उत्पादन और आर्थिक समृद्धि की फसल उगा रहा है।

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