Site icon हिट एंड हॉट न्यूज़

🌾 “खेत बचाओ, धरती बचाओ” बने जन-आंदोलन: कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का किसानों से बड़ा आह्वान

भारत की कृषि व्यवस्था को अधिक टिकाऊ, समृद्ध और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों और कृषि वैज्ञानिकों से एक महत्वपूर्ण अपील की है। उन्होंने कहा कि “खेत बचाओ, धरती बचाओ” केवल एक अभियान नहीं, बल्कि पूरे देश का जन-आंदोलन बनना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए उपजाऊ भूमि, स्वच्छ पर्यावरण और सुरक्षित खाद्य व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।

यह संदेश ‘खेत बचाओ अभियान 2026’ के समापन समारोह के दौरान दिया गया, जहाँ वैज्ञानिक खेती, संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती और मृदा संरक्षण पर विशेष बल दिया गया।

अभियान का उद्देश्य

‘खेत बचाओ अभियान’ का मुख्य उद्देश्य किसानों को ऐसी कृषि पद्धतियाँ अपनाने के लिए प्रेरित करना है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहे, उत्पादन बढ़े और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव कम हो। इसके तहत किसानों को आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक सलाह से जोड़ने पर भी जोर दिया गया।

संतुलित उर्वरक उपयोग पर विशेष जोर

कृषि मंत्री ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों का अंधाधुंध उपयोग मिट्टी की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। इसलिए किसानों को संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग, जैविक विकल्पों को अपनाने और मिट्टी की नियमित जांच कराने की सलाह दी गई। इससे उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ खेती की लागत भी नियंत्रित की जा सकती है।

प्राकृतिक खेती और वैज्ञानिक तकनीक का महत्व

उन्होंने प्राकृतिक खेती को भविष्य की आवश्यकता बताते हुए कहा कि यह न केवल पर्यावरण के लिए लाभदायक है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और मिट्टी की सेहत सुधारने में भी सहायक हो सकती है। साथ ही आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों, बेहतर बीज, जल संरक्षण और नई कृषि पद्धतियों को अपनाने की भी अपील की गई।

मृदा संरक्षण पर गंभीर चिंता

कार्यक्रम में मृदा स्वास्थ्य को कृषि की सबसे बड़ी पूंजी बताया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि यदि आज मिट्टी का संरक्षण नहीं किया गया, तो भविष्य में कृषि उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसलिए जल संरक्षण, फसल चक्र और जैविक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।

ICAR की अहम भूमिका

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के वैज्ञानिकों ने किसानों को वैज्ञानिक खेती, उन्नत तकनीकों और टिकाऊ कृषि मॉडल अपनाने के लिए प्रेरित किया। संस्थान का उद्देश्य किसानों तक नई कृषि तकनीकों को पहुँचाकर खेती को अधिक लाभकारी और पर्यावरण-अनुकूल बनाना है।

मुख्य बिंदु

निष्कर्ष

भारत की कृषि केवल उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और करोड़ों किसानों के जीवन का आधार है। ऐसे में “खेत बचाओ, धरती बचाओ” का संदेश केवल किसानों तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। यदि वैज्ञानिक खेती, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और संतुलित उर्वरक उपयोग को व्यापक स्तर पर अपनाया जाए, तो भारत की कृषि अधिक समृद्ध, टिकाऊ और भविष्य के लिए सुरक्षित बन सकती है।

Exit mobile version