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‘अवसरों का महासागर’ का महामंत्र: सेशेल्स से प्रधानमंत्री मोदी का वैश्विक संदेश, हिंद महासागर के भविष्य की नई दिशा

भारत और सेशेल्स के बीच मित्रता, विश्वास और सामरिक साझेदारी को नई मजबूती देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेशेल्स की धरती से हिंद महासागर क्षेत्र के भविष्य को लेकर एक दूरदर्शी और प्रेरणादायक विजन दुनिया के सामने रखा। संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का उद्देश्य किसी पर प्रभुत्व स्थापित करना नहीं, बल्कि सभी देशों के साथ समानता, सम्मान और सहयोग के आधार पर विकास का नया अध्याय लिखना है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हिंद महासागर केवल जल का विशाल विस्तार नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका, वैश्विक व्यापार, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता का आधार है। ऐसे में भारत चाहता है कि यह क्षेत्र संघर्ष का नहीं, बल्कि शांति, समृद्धि और साझा अवसरों का केंद्र बने।

उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि भारत और सेशेल्स की साझेदारी आपसी विश्वास, पारस्परिक सम्मान और साझा हितों पर आधारित है। भारत हमेशा छोटे और बड़े सभी देशों को समान महत्व देता है और यही उसकी विदेश नीति की सबसे बड़ी ताकत है। भारत का मानना है कि स्थायी विकास तभी संभव है जब सभी देश साथ मिलकर आगे बढ़ें और किसी को भी विकास की दौड़ में पीछे न छोड़ा जाए।

प्रधानमंत्री ने हिंद महासागर को “Ocean of Opportunity” (अवसरों का महासागर) बनाने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि इस क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना, व्यापारिक संपर्क बढ़ाना, ब्लू इकोनॉमी को प्रोत्साहन देना, प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग सुनिश्चित करना और आपदा प्रबंधन में सहयोग बढ़ाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। भारत इन सभी क्षेत्रों में अपने मित्र देशों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

भारत की यह सोच केवल रणनीतिक हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवता, साझी समृद्धि और क्षेत्रीय स्थिरता की व्यापक भावना को भी प्रतिबिंबित करती है। सेशेल्स के साथ बढ़ता सहयोग इस बात का प्रमाण है कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र में विश्वास, विकास और सुरक्षा का विश्वसनीय साझेदार बनकर उभर रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश न केवल भारत-सेशेल्स संबंधों को नई ऊर्जा देता है, बल्कि पूरे हिंद महासागर क्षेत्र के लिए शांति, सहयोग और साझा विकास का एक सशक्त रोडमैप भी प्रस्तुत करता है। आने वाले समय में यह विजन क्षेत्रीय सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने और हिंद महासागर को वास्तव में “अवसरों का महासागर” बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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