
गुवाहाटी, 3 जुलाई 2026: असम के लखीपुर क्षेत्र में इंसानों और जंगली हाथियों के बीच होने वाले संघर्ष को कम करने के लिए अपनाई गई रणनीति ने उल्लेखनीय परिणाम दिए हैं। वन विभाग, स्थानीय ग्रामीणों और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े संगठनों के साझा प्रयासों से न केवल मानव जीवन की सुरक्षा बढ़ी है, बल्कि हाथियों के संरक्षण को भी नई मजबूती मिली है। इस मॉडल को अब अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के लिए भी एक प्रभावी उदाहरण माना जा रहा है।
हादसों में आई उल्लेखनीय गिरावट
पिछले कुछ वर्षों में हाथियों के कारण होने वाली जनहानि में लगातार कमी दर्ज की गई है। जहां वर्ष 2022 में इस तरह की घटनाओं में 19 लोगों की मौत हुई थी, वहीं वर्ष 2025 तक यह आंकड़ा घटकर केवल 2 रह गया। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर चेतावनी, बेहतर निगरानी व्यवस्था और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी ने इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई है।
आधुनिक तकनीक बनी सुरक्षा की ढाल
संवेदनशील गांवों में सौर ऊर्जा आधारित सुरक्षा बाड़, सोलर स्ट्रीट लाइट और रिचार्ज होने वाली टॉर्च जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इन उपायों से रात के समय हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखना आसान हुआ है और ग्रामीणों को समय रहते सतर्क होने का अवसर मिल जाता है। इससे मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव की घटनाओं में कमी आई है।
हजारों लोगों को मिला लाभ
लखीपुर क्षेत्र में अब तक लगभग 47 किलोमीटर लंबी सौर सुरक्षा बाड़ स्थापित की जा चुकी है। इस व्यवस्था का लाभ 18 संवेदनशील गांवों के लगभग 1,440 परिवारों को मिल रहा है। सुरक्षा उपायों के कारण किसानों की फसलों की रक्षा के साथ-साथ ग्रामीणों में भी सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है।
सामुदायिक भागीदारी बनी सफलता की कुंजी
वन विभाग ने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर जागरूकता अभियान चलाए, जिससे ग्रामीणों को हाथियों के व्यवहार, सुरक्षित दूरी बनाए रखने और आपात स्थिति में अपनाए जाने वाले उपायों की जानकारी दी गई। गांव स्तर पर बने स्वयंसेवी समूह भी हाथियों की मौजूदगी की सूचना तुरंत साझा करते हैं, जिससे संभावित हादसों को टालने में मदद मिलती है।
अन्य राज्यों के लिए उदाहरण
विशेषज्ञों का मानना है कि लखीपुर मॉडल यह साबित करता है कि आधुनिक तकनीक, प्रभावी योजना और स्थानीय समुदाय की सहभागिता के जरिए इंसान और वन्यजीवों के बीच संघर्ष को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यदि इसी तरह की पहल अन्य हाथी प्रभावित क्षेत्रों में भी लागू की जाए, तो मानव जीवन की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण दोनों लक्ष्यों को एक साथ हासिल किया जा सकता है।
