
इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर की 20 वर्षीय NEET अभ्यर्थी निक्की यादव की असामयिक मौत ने पूरे देश को भावुक कर दिया है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, घटना से पहले उन्होंने बाइक टैक्सी के जरिए लंबा सफर तय किया था। इस दौरान उनका व्यवहार बेहद शांत बताया गया। चालक के अनुसार, यात्रा के अंत में उन्होंने 350 रुपये देते हुए कहा, “इनसे डिनर कर लेना।” इसके बाद सामने आई दुखद खबर ने सभी को स्तब्ध कर दिया।
शांत सफर ने खड़े किए कई सवाल
बाइक टैक्सी चालक के बयान के मुताबिक, निक्की ने पूरे रास्ते बहुत कम बातचीत की। लगभग 85 किलोमीटर की यात्रा के दौरान वह ज्यादातर खामोश रहीं और किसी गहरी सोच में डूबी हुई नजर आईं। हालांकि उन्होंने किसी परेशानी का खुलकर जिक्र नहीं किया, लेकिन उनका व्यवहार सामान्य से अलग महसूस हुआ।
आखिरी मुलाकात बनी यादगार
यात्रा समाप्त होने से पहले निक्की ने चालक को अतिरिक्त पैसे दिए और उनसे डिनर कर लेने की बात कही। उस समय चालक ने इसे सामान्य शिष्टाचार समझा, लेकिन बाद में जब उनकी मौत की जानकारी मिली तो यह छोटी-सी बातचीत एक भावुक याद बन गई।
जांच में जुटी पुलिस
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी। अधिकारियों का कहना है कि सभी परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों की बारीकी से जांच की जा रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मौत के कारणों को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। साथ ही लोगों से अपुष्ट जानकारी और अफवाहों से बचने की अपील की गई है।
छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ी चिंता
यह घटना एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव की ओर ध्यान आकर्षित करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा की तैयारी के साथ-साथ भावनात्मक सहयोग, परिवार का समर्थन और समय पर काउंसलिंग भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यदि किसी छात्र के व्यवहार में अचानक बदलाव दिखाई दे, तो उसे गंभीरता से लेना चाहिए।
निष्कर्ष
निक्की यादव की मौत एक बेहद दुखद घटना है, जिसने समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि सफलता की दौड़ में मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी कितनी भारी पड़ सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं और उम्मीद की जा रही है कि जांच पूरी होने के बाद घटना की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी। तब तक इस मामले में केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करना सबसे उचित होगा।
