
इटली में जिस रासायनिक तकनीक पर पर्यावरण प्रदूषण के गंभीर आरोप लगे और जिसने लाखों लोगों की सेहत को खतरे में डाल दिया, उसी तकनीक और उत्पादन अवसंरचना के महाराष्ट्र पहुंचने के बाद भारत में एक नई बहस शुरू हो गई है। सवाल यह है कि क्या भारत दुनिया के उन रसायनों का नया ठिकाना बन रहा है, जिन्हें विकसित देश धीरे-धीरे छोड़ रहे हैं?
🌍 क्या हैं ‘फॉरएवर केमिकल्स’?
PFAS (Per- and Polyfluoroalkyl Substances) को “फॉरएवर केमिकल्स” कहा जाता है क्योंकि ये पर्यावरण में आसानी से नष्ट नहीं होते। ये पानी, मिट्टी और मानव शरीर में लंबे समय तक बने रह सकते हैं। कई वैज्ञानिक अध्ययनों में इनके संपर्क को कैंसर, हार्मोनल असंतुलन, प्रतिरक्षा प्रणाली पर प्रभाव तथा अन्य स्वास्थ्य जोखिमों से जोड़ा गया है।
🇮🇹 इटली में क्या हुआ था?
इटली की Miteni कंपनी का PFAS उत्पादन संयंत्र गंभीर पर्यावरणीय विवादों के बाद बंद हो गया था। Veneto क्षेत्र में भूजल प्रदूषण के कारण लाखों लोग प्रभावित हुए। बाद में कंपनी दिवालिया हो गई और उसके कई पूर्व अधिकारियों को पर्यावरणीय अपराधों से जुड़े मामलों में सजा भी सुनाई गई।
🇮🇳 क्या महाराष्ट्र में नई कंपनी खुल रही है?
सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि इटली की कंपनी भारत आ गई है। वास्तविकता थोड़ी अलग है।
इटली की Miteni कंपनी महाराष्ट्र में नई कंपनी के रूप में स्थापित नहीं हुई है। हालांकि, उसकी PFAS उत्पादन से जुड़ी निर्माण अवसंरचना और तकनीक को 2021-22 के दौरान भारत की Laxmi Organic Industries ने खरीदा था। यह अवसंरचना महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के लोटे परशुराम औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित की गई है, जिसका संचालन उसकी सहायक कंपनी Yellowstone Fine Chemicals कर रही है।
🏭 महाराष्ट्र के प्लांट को मिली हैं मंजूरियां
केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि इस प्लांट को पर्यावरणीय मंजूरियां प्राप्त हैं। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, यहां अपशिष्ट जल उपचार प्रणाली और वायु प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली स्थापित हैं तथा निरीक्षण के दौरान नमूने निर्धारित मानकों के भीतर पाए गए हैं।
⚠️ फिर विवाद क्यों हो रहा है?
विवाद की सबसे बड़ी वजह यह है कि जिस तकनीक और उत्पादन प्रणाली पर इटली में गंभीर सवाल उठे थे, उसका उपयोग अब भारत में किया जा रहा है। पर्यावरणविदों का कहना है कि PFAS रसायनों पर भारत में अभी तक कोई विशेष प्रतिबंधात्मक कानून नहीं है, जबकि दुनिया के कई देश इनके उपयोग को सीमित करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
🧪 महाराष्ट्र सरकार ने भी दिखाई गंभीरता
PFAS उत्पादन को लेकर स्थानीय लोगों और पर्यावरण समूहों की चिंताओं के बाद महाराष्ट्र सरकार ने जांच के लिए विशेषज्ञ संस्थान से अध्ययन कराने की घोषणा की थी। इस मुद्दे को संसद और राज्य विधानमंडल तक उठाया जा चुका है।
📢 सोशल मीडिया के दावों को कैसे समझें?
“Modiji, Italy se ye kya le aaye?” जैसे वायरल पोस्ट राजनीतिक व्यंग्य का हिस्सा हैं। लेकिन तथ्य यह है कि भारत में कोई इतालवी कंपनी सीधे नहीं खुली है। वास्तविक मामला यह है कि एक भारतीय कंपनी ने इटली की बंद हो चुकी कंपनी की PFAS उत्पादन अवसंरचना और तकनीक का अधिग्रहण किया है, जिसके पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर बहस जारी है।
निष्कर्ष
PFAS केवल एक रासायनिक उत्पाद नहीं, बल्कि पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा वैश्विक मुद्दा बन चुका है। महाराष्ट्र में स्थापित प्लांट फिलहाल सरकारी मंजूरियों और नियामकीय मानकों के तहत संचालित होने का दावा करता है, लेकिन इसकी तकनीक के इतिहास और PFAS के संभावित जोखिमों को देखते हुए पारदर्शिता, वैज्ञानिक जांच और कड़ी निगरानी बेहद आवश्यक है।
भारत के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या आर्थिक विकास और औद्योगिक निवेश के साथ-साथ पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है?
