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एम्स जोधपुर ने रचा चिकित्सा इतिहास: 7 वर्षीय मासूम के पेट से निकाला 3.7 किलो का विशाल ट्यूमर, नई जिंदगी देने में डॉक्टरों को मिली बड़ी सफलता

जोधपुर। राजस्थान के एम्स जोधपुर ने बाल चिकित्सा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए 7 वर्षीय बच्चे की जान बचाकर चिकित्सा जगत में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की बहुविषयक टीम ने लगभग 3.7 किलोग्राम विल्म्स ट्यूमर (Wilms Tumour) को सफलतापूर्वक निकालते हुए एक ऐसी जटिल सर्जरी को अंजाम दिया, जिसे अस्पताल की सबसे कठिन पीडियाट्रिक कैंसर सर्जरियों में गिना जा रहा है। इस सफल ऑपरेशन के बाद बच्चा तेजी से स्वस्थ हो रहा है।

6 घंटे तक चला जीवन बचाने का संघर्ष

डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि ट्यूमर बच्चे के दाहिने गुर्दे को पूरी तरह प्रभावित कर चुका था और शरीर की प्रमुख रक्त वाहिनी इन्फीरियर वेना कावा (IVC) तक फैल गया था। ऐसे मामलों में मामूली चूक भी मरीज की जान के लिए खतरा बन सकती है।

करीब छह घंटे तक चले इस जटिल ऑपरेशन के दौरान विशेषज्ञों ने न केवल विशाल ट्यूमर को सावधानीपूर्वक बाहर निकाला, बल्कि प्रभावित रक्त वाहिनी का सफल पुनर्निर्माण भी किया। डॉक्टरों की कुशलता, आधुनिक तकनीक और टीमवर्क के कारण यह चुनौतीपूर्ण सर्जरी पूरी तरह सफल रही।

सरकारी योजना बनी परिवार के लिए संबल

इस योजना के अंतर्गत बच्चे का पूरा इलाज निःशुल्क किया गया, जिससे परिवार पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ा और समय पर उपचार संभव हो सका।

डॉक्टरों ने अभिभावकों को किया सतर्क

सर्जरी की सफलता के बाद विशेषज्ञों ने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों में पेट की असामान्य सूजन, लगातार बढ़ता उभार, दर्द या अन्य असामान्य लक्षणों को कभी नजरअंदाज न करें। समय रहते जांच और उपचार से गंभीर बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है और बच्चे का जीवन सुरक्षित किया जा सकता है।

चिकित्सा जगत के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि

एम्स जोधपुर की इस सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अनुभवी चिकित्सकों, आधुनिक चिकित्सा तकनीक और समर्पित टीमवर्क के बल पर सबसे कठिन चुनौतियों का भी सफलतापूर्वक सामना किया जा सकता है। यह उपलब्धि न केवल एक मासूम को नया जीवन देने की कहानी है, बल्कि देश की स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता का भी प्रेरणादायक उदाहरण है।

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