
वॉशिंगटन। अमेरिका में राष्ट्रपति जो बाइडेन द्वारा 16 अगस्त 2022 को हस्ताक्षरित इन्फ्लेशन रिडक्शन एक्ट (IRA) को चार साल पूरे होने के मौके पर इसकी उपलब्धियों और मौजूदा ट्रंप प्रशासन की नीतियों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। बाइडेन प्रशासन ने इस कानून को स्वास्थ्य सेवाओं की लागत कम करने, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने, रोजगार पैदा करने और जलवायु संकट से निपटने की दिशा में ऐतिहासिक कदम के रूप में पेश किया था।
अब डेमोक्रेटिक खेमे का आरोप है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार बाइडेन काल की कई नीतियों को वापस लेने या कमजोर करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। दूसरी ओर, ट्रंप समर्थक इसे सरकारी खर्च और नियामकीय बोझ कम करने तथा घरेलू ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाने की नीति बताते हैं। इस तरह IRA को लेकर विवाद केवल एक कानून तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अमेरिका की स्वास्थ्य व्यवस्था, ऊर्जा नीति, रोजगार और जलवायु रणनीति की भविष्य की दिशा से जुड़ गया है।
2022 में क्यों महत्वपूर्ण था इन्फ्लेशन रिडक्शन एक्ट?
16 अगस्त 2022 को बाइडेन ने IRA पर हस्ताक्षर किए थे। कानून में स्वास्थ्य, जलवायु और कर व्यवस्था से जुड़े कई बड़े प्रावधान शामिल किए गए। कांग्रेस की रिसर्च सर्विस के अनुसार, इस कानून ने मेडिकेयर के तहत कुछ महंगी दवाओं की कीमतों पर सरकार को बातचीत करने का अधिकार दिया। यह प्रक्रिया 2026 से चयनित दवाओं के साथ शुरू होने के लिए निर्धारित की गई थी।
कानून का एक प्रमुख उद्देश्य उन वरिष्ठ नागरिकों और मरीजों को राहत देना था, जिन्हें महंगी दवाओं के कारण आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ता है। इसके तहत मेडिकेयर पार्ट डी से जुड़ी जेब से होने वाली वार्षिक दवा लागत पर सीमा निर्धारित की गई और मेडिकेयर लाभार्थियों के लिए इंसुलिन की कीमत को 35 डॉलर प्रति माह तक सीमित करने का प्रावधान किया गया।
इसके अलावा, दवा कंपनियों को कुछ परिस्थितियों में कीमतें महंगाई से तेज बढ़ाने पर मेडिकेयर को भुगतान करने की व्यवस्था भी की गई। इससे दवा कीमतों को नियंत्रित करने की अमेरिकी सरकार की क्षमता पहले की तुलना में बढ़ी।
दवाओं की कीमत पर सीधा असर
IRA का सबसे चर्चित हिस्सा दवा कीमतों को लेकर रहा है। कानून ने पहली बार मेडिकेयर को कुछ महंगी दवाओं के लिए निर्माताओं से सीधे कीमतों पर बातचीत करने की अनुमति दी।
KFF के अनुसार, कानून के विभिन्न प्रावधानों का उद्देश्य मेडिकेयर लाभार्थियों की जेब से होने वाले खर्च को कम करना और संघीय सरकार के दवा खर्च पर नियंत्रण बढ़ाना था।
हालिया अमेरिकी बहस में यह मुद्दा और महत्वपूर्ण हो गया है। अगस्त 2026 में सामने आई एक रिपोर्ट में भी यह बात रेखांकित की गई कि दवा कीमतों में हालिया गिरावट के पीछे बाइडेन काल में शुरू किए गए मेडिकेयर नेगोशिएशन प्रावधान की भूमिका रही है।
इससे यह सवाल उठता है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में पहले से लागू सुधारों को कमजोर करने या उनकी संरचना बदलने का असर आने वाले वर्षों में मरीजों और सरकार के खर्च पर कितना पड़ेगा।
इंसुलिन और वरिष्ठ नागरिकों को राहत
अमेरिका में इंसुलिन की कीमत लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय रही है। IRA ने मेडिकेयर से जुड़े लाभार्थियों के लिए इंसुलिन पर 35 डॉलर मासिक सीमा लागू की। इसके अलावा मेडिकेयर पार्ट डी में कई अन्य बदलाव किए गए।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि IRA के तहत इंसुलिन सीमा और दूसरी दवा नीतियां अलग-अलग प्रावधानों पर आधारित हैं। 2025 में रॉयटर्स के एक फैक्ट-चेक ने भी स्पष्ट किया था कि मेडिकेयर के लिए 35 डॉलर की इंसुलिन सीमा को उस समय के एक अलग राष्ट्रपति आदेश के साथ मिलाना सही नहीं है।
स्वच्छ ऊर्जा और रोजगार पर जोर
IRA केवल स्वास्थ्य क्षेत्र का कानून नहीं था। इसका दूसरा बड़ा स्तंभ जलवायु और स्वच्छ ऊर्जा निवेश था। कानून के तहत सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी, ऊर्जा दक्षता और स्वच्छ विनिर्माण जैसी गतिविधियों को विभिन्न टैक्स क्रेडिट और प्रोत्साहनों से बढ़ावा दिया गया।
बाइडेन प्रशासन के अनुसार, कानून लागू होने के शुरुआती एक वर्ष में कंपनियों ने 110 अरब डॉलर से अधिक के नए स्वच्छ ऊर्जा विनिर्माण निवेश की घोषणा की थी। इसी अवधि में स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में 170,000 से अधिक नौकरियों के सृजन का अनुमान भी सामने आया था।
इन निवेशों का उद्देश्य केवल प्रदूषण कम करना नहीं था। नीति निर्माताओं ने इसे अमेरिकी विनिर्माण क्षमता को मजबूत करने, घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाओं को विकसित करने और नई तकनीकों में अमेरिका की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति बढ़ाने के साधन के रूप में भी देखा।
ट्रंप प्रशासन की दिशा में बदलाव
डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में ऊर्जा और पर्यावरण नीति को लेकर दृष्टिकोण बाइडेन प्रशासन से अलग दिखाई देता है। ट्रंप प्रशासन ने कई बाइडेन-कालीन नियमों और नीतियों की समीक्षा, संशोधन या समाप्ति की प्रक्रिया शुरू की है। ब्रुकिंग्स के नियामकीय ट्रैकर के अनुसार, स्वास्थ्य, पर्यावरण, श्रम और ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों में ट्रंप प्रशासन ने नियमों में व्यापक बदलाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है।
ट्रंप समर्थकों का तर्क है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था को अधिक ऊर्जा उत्पादन, कम सरकारी हस्तक्षेप और व्यवसायों के लिए आसान नियमन की जरूरत है। उनके अनुसार, अत्यधिक पर्यावरणीय नियम ऊर्जा और विनिर्माण की लागत बढ़ा सकते हैं।
वहीं आलोचकों का कहना है कि स्वच्छ ऊर्जा प्रोत्साहनों को कमजोर करने से अमेरिका दीर्घकालिक ऊर्जा परिवर्तन और जलवायु लक्ष्यों में पीछे जा सकता है।
प्रदूषण बनाम आर्थिक विकास की बहस
IRA की विरासत पर बहस का एक अहम हिस्सा यह है कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण को किस तरह साथ लेकर चला जाए। समर्थकों का मानना है कि स्वच्छ ऊर्जा में निवेश भविष्य के उद्योगों और रोजगार के लिए आधार तैयार करता है।
दूसरी तरफ, ट्रंप समर्थक ऊर्जा उत्पादन में तेल और गैस समेत पारंपरिक स्रोतों की भूमिका बढ़ाने को अमेरिकी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक प्रतिस्पर्धा से जोड़ते हैं। मौजूदा प्रशासन के समर्थक इसे ‘अमेरिका फर्स्ट’ आर्थिक नीति का हिस्सा बताते हैं।
यही अंतर दोनों राजनीतिक दृष्टिकोणों को अलग करता है। बाइडेन की नीति में सरकारी प्रोत्साहन के जरिए स्वच्छ ऊर्जा उद्योग को आगे बढ़ाने पर जोर था, जबकि ट्रंप प्रशासन निजी क्षेत्र, घरेलू ऊर्जा संसाधनों और कम नियामकीय हस्तक्षेप पर अधिक जोर देता है।
आम अमेरिकी परिवार के लिए इसका क्या मतलब?
IRA की बहस का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि इसका असर आम नागरिक के जीवन पर कैसे पड़ता है। किसी वरिष्ठ नागरिक के लिए दवा का खर्च कम होना सीधे घरेलू बजट को प्रभावित करता है। इसी तरह ऊर्जा दक्षता और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े प्रोत्साहन घरों तथा व्यवसायों की ऊर्जा लागत को प्रभावित कर सकते हैं।
दूसरी ओर, सरकारी प्रोत्साहनों में बदलाव से कंपनियों के निवेश फैसले प्रभावित हो सकते हैं। इससे नई फैक्ट्रियों, ऊर्जा परियोजनाओं और रोजगार के अवसरों पर भी असर पड़ सकता है।
इसलिए IRA पर विवाद को केवल डेमोक्रेट बनाम रिपब्लिकन संघर्ष के रूप में देखना अधूरा होगा। इसके पीछे यह बड़ा सवाल है कि अमेरिका स्वास्थ्य, ऊर्जा और पर्यावरण के क्षेत्र में सरकार की भूमिका को कितना रखना चाहता है।
चार साल बाद कानून की विरासत
चार साल बाद IRA अमेरिकी राजनीति में एक महत्वपूर्ण नीति-चिह्न बन चुका है। कानून ने मेडिकेयर को कुछ दवाओं की कीमतों पर बातचीत की शक्ति दी, इंसुलिन और अन्य दवा खर्चों पर राहत के प्रावधान लागू किए और स्वच्छ ऊर्जा तथा जलवायु परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर प्रोत्साहन उपलब्ध कराए।
अब ट्रंप प्रशासन द्वारा बाइडेन-युग की नीतियों में बदलाव के प्रयासों ने इस कानून के भविष्य को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। रिपब्लिकन पक्ष इसे सरकारी खर्च और नियमन को कम करने की दिशा में आवश्यक कदम मानता है, जबकि डेमोक्रेटिक पक्ष इसे स्वास्थ्य लागत और जलवायु कार्रवाई से पीछे हटने के रूप में देखता है।
आने वाले वर्षों में यह तय होगा कि IRA के कौन से प्रावधान लंबे समय तक अमेरिकी नीति का हिस्सा बने रहते हैं और किन्हें बदला जाता है। लेकिन इतना स्पष्ट है कि 16 अगस्त 2022 को हस्ताक्षरित यह कानून अमेरिका की स्वास्थ्य और ऊर्जा नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ है। इसकी विरासत पर चल रही बहस आने वाले वर्षों में भी अमेरिकी राजनीति, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण नीति को प्रभावित करती रहेगी।
