
दमिश्क: फ्रांस के राष्ट्रपति ने 6 जुलाई 2026 को सीरिया की राजधानी दमिश्क का ऐतिहासिक दौरा कर दोनों देशों के संबंधों में नए दौर की शुरुआत का संकेत दिया। वर्ष 2024 में की सरकार के पतन और के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बाद किसी पश्चिमी यूरोपीय देश के राष्ट्राध्यक्ष की यह पहली आधिकारिक यात्रा मानी जा रही है।
नई राजनीतिक परिस्थितियों में फ्रांस का संदेश
दमिश्क पहुंचने के बाद राष्ट्रपति मैक्रों ने स्पष्ट किया कि फ्रांस एक ऐसे सीरिया का समर्थन करता है जो अपनी संप्रभुता बनाए रखते हुए सभी समुदायों को समान सम्मान दे और क्षेत्रीय शांति को मजबूत करने में सकारात्मक भूमिका निभाए। उन्होंने कहा कि देश का भविष्य लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक समावेश और स्थिरता पर आधारित होना चाहिए।
पुनर्निर्माण और निवेश पर विशेष ध्यान
यात्रा के दौरान फ्रांसीसी प्रतिनिधिमंडल ने सीरिया के पुनर्निर्माण से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों पर चर्चा की। ऊर्जा, परिवहन, बंदरगाह और बुनियादी ढांचे में निवेश की संभावनाओं को लेकर कई स्तरों पर बातचीत हुई। फ्रांस की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी आर्थिक सहयोग और दीर्घकालिक निवेश के अवसरों का आकलन किया।
समावेशी शासन पर जोर
मैक्रों ने अपने संबोधन में कहा कि सीरिया की स्थायी शांति तभी संभव है जब देश के सभी धार्मिक, जातीय और सामाजिक समुदायों को समान अधिकार और सुरक्षा मिले। उन्होंने ऐसी शासन व्यवस्था की आवश्यकता बताई जिसमें विविधता को शक्ति के रूप में स्वीकार किया जाए और सभी नागरिकों को बराबरी का अवसर मिले।
मानवाधिकार और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा प्रमुख मुद्दा
फ्रांस ने सीरिया में मानवाधिकारों की रक्षा और अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल बताया। हाल के वर्षों में हुए सांप्रदायिक तनावों का उल्लेख करते हुए मैक्रों ने कहा कि स्थायी शांति के लिए सभी नागरिकों का विश्वास जीतना और कानून का समान रूप से पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है।
सीरिया ने जताई सकारात्मक उम्मीद
सीरियाई सरकार ने इस यात्रा का स्वागत करते हुए इसे यूरोपीय देशों के साथ रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। वहीं कई नागरिकों ने भी उम्मीद जताई कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ने से देश में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी, रोजगार के नए अवसर बनेंगे और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी।
क्षेत्रीय कूटनीति में बढ़ेगी सक्रियता
दमिश्क दौरे के बाद राष्ट्रपति मैक्रों के तुर्किये में आयोजित नाटो से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेने की भी संभावना है, जहां क्षेत्रीय सुरक्षा, मध्य पूर्व की स्थिति और सीरिया से जुड़े मुद्दों पर कई देशों के नेताओं के बीच चर्चा होने की उम्मीद है।
क्या बदल सकते हैं फ्रांस-सीरिया संबंध?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा केवल औपचारिक कूटनीतिक मुलाकात नहीं है, बल्कि इससे दोनों देशों के बीच राजनीतिक संवाद, आर्थिक सहयोग और पुनर्निर्माण परियोजनाओं में नई संभावनाएं खुल सकती हैं। यदि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो सीरिया को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक सहयोग मिलने की राह भी आसान हो सकती है।
निष्कर्ष
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की दमिश्क यात्रा ने यह संकेत दिया है कि बदलते राजनीतिक माहौल में फ्रांस सीरिया के साथ नए संबंध स्थापित करने का इच्छुक है। पुनर्निर्माण, समावेशी शासन, मानवाधिकारों की सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति जैसे मुद्दे इस नई साझेदारी के केंद्र में रह सकते हैं। आने वाले समय में यह पहल मध्य पूर्व की कूटनीति और सीरिया के भविष्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है।
