
नई दिल्ली: साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच दिल्ली पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने पश्चिम बंगाल से तीन ऐसे आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन पर कथित तौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर लोगों को ठगने वाले संगठित गिरोह से जुड़े होने का आरोप है। प्रारंभिक जांच के अनुसार यह नेटवर्क कई राज्यों में सक्रिय था और लोगों को सरकारी जांच का भय दिखाकर उनसे बड़ी रकम ऐंठता था।
कैसे करते थे ठगी?
जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपी खुद को ईडी, सीबीआई, पुलिस या अन्य सरकारी विभागों का अधिकारी बताकर लोगों से संपर्क करते थे। वे फोन या वीडियो कॉल के जरिए दावा करते थे कि पीड़ित किसी गंभीर मामले में फंस गया है और उसे तुरंत कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
इसके बाद पीड़ित पर मानसिक दबाव बनाया जाता था। वीडियो कॉल के माध्यम से उसे यह विश्वास दिलाया जाता था कि वह “डिजिटल अरेस्ट” की स्थिति में है और यदि उसने अधिकारियों के निर्देश नहीं माने तो कानूनी कार्रवाई होगी। डर और घबराहट के माहौल में कई लोग उनकी बातों में आकर पैसे ट्रांसफर कर देते थे।
डिजिटल माध्यमों का करते थे इस्तेमाल
ठगी से प्राप्त रकम को आरोपी अलग-अलग डिजिटल वॉलेट, बैंक खातों और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए इधर-उधर भेजते थे, ताकि पैसों के स्रोत और गंतव्य का आसानी से पता न लगाया जा सके। पुलिस अब इस पूरे वित्तीय नेटवर्क की भी जांच कर रही है।
कई राज्यों तक फैला था नेटवर्क
प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह गिरोह केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं था, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में लोगों को निशाना बना रहा था। पुलिस को आशंका है कि कई पीड़ित अब तक सामने भी नहीं आए हैं। जांच के दौरान ऐसे कई मामलों की जानकारी जुटाई जा रही है, जिनमें इसी तरह की ठगी की गई हो सकती है।
साइबर जागरूकता की जरूरत
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि साइबर अपराधी लोगों के डर और जल्दबाजी का फायदा उठाकर उन्हें आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को “डिजिटल अरेस्ट” नहीं करती और न ही तत्काल पैसे जमा कराने का निर्देश देती है।
क्या रखें सावधानी?
- किसी भी अनजान कॉल या वीडियो कॉल पर तुरंत भरोसा न करें।
- यदि कोई खुद को सरकारी अधिकारी बताकर पैसे मांगता है, तो पहले उसकी पहचान की पुष्टि करें।
- घबराहट में किसी भी खाते या डिजिटल वॉलेट में धनराशि ट्रांसफर न करें।
- संदेह होने पर तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
निष्कर्ष
दिल्ली पुलिस की यह कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी नई ठगी की तकनीकों से बचाव के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों की सतर्कता के साथ-साथ आम नागरिकों की जागरूकता भी उतनी ही आवश्यक है। जितनी अधिक सतर्कता बरती जाएगी, साइबर ठगों के लिए लोगों को अपना शिकार बनाना उतना ही कठिन होगा।
