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बरसात में खतरे का रास्ता बना कारीकोट–कुङकुङी कुवा मार्ग, जर्जर पुलिया से हर दिन दांव पर लोगों की जान

अमृतपाल बहराइच

संवाददाता हिट हॉट न्यूज़

बरसात का मौसम शुरू होते ही मिहींपुरवा क्षेत्र के कारीकोट से कुङकुङी कुवा होते हुए बड़खड़िया जाने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग एक बार फिर गंभीर समस्या का केंद्र बन गया है। इस मार्ग पर स्थित पुलिया और उसके आसपास की सड़क बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है, जिससे यहां से गुजरने वाले लोगों को हर दिन दुर्घटना का डर सताता रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से यह समस्या बनी हुई है, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं हो सका।

सड़क के बीच बना गहरा गड्ढा बना बड़ा खतरा

पुलिया के पास सड़क धंस जाने से बीच रास्ते में गहरा गड्ढा बन गया है। बारिश का पानी भर जाने के कारण इसकी वास्तविक गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में दोपहिया वाहन चालक, साइकिल सवार और पैदल राहगीर सबसे अधिक जोखिम उठाने को मजबूर हैं। रात के समय या तेज बारिश के दौरान यह खतरा और बढ़ जाता है।

हर वर्ष होती है अस्थायी मरम्मत

ग्रामीणों के अनुसार संबंधित विभाग हर साल बरसात से पहले या बाद में केवल मिट्टी और मलबे की बोरियां डालकर रास्ते को अस्थायी रूप से ठीक करने का प्रयास करता है। लेकिन पहली तेज बारिश में यह सामग्री बह जाती है और सड़क फिर पहले जैसी खराब स्थिति में पहुंच जाती है। इससे स्पष्ट है कि अब तक केवल औपचारिकता निभाई गई है, स्थायी निर्माण पर ध्यान नहीं दिया गया।

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सुरक्षा के लिए ग्रामीणों ने खुद उठाया कदम

जब प्रशासन की ओर से कोई चेतावनी संकेत या बैरिकेडिंग नहीं लगाई गई, तब स्थानीय लोगों ने स्वयं पहल की। उन्होंने गड्ढे के बीच सूखी पेड़ की टहनी गाड़कर उस पर लाल कपड़ा बांध दिया, ताकि दूर से आने वाले वाहन चालकों को खतरे का संकेत मिल सके। यह प्रयास ग्रामीणों की जागरूकता तो दिखाता है, लेकिन साथ ही यह प्रशासनिक उदासीनता की भी तस्वीर पेश करता है।

स्कूली बच्चों और ग्रामीणों के लिए बढ़ी परेशानी

यह मार्ग आसपास के कई गांवों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण रास्ता है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, किसान, मजदूर और अन्य ग्रामीण इसी रास्ते से आवागमन करते हैं। खराब सड़क और जर्जर पुलिया के कारण लोगों को हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। कई बार वाहन चालक गड्ढे से बचने के प्रयास में संतुलन खो देते हैं, जिससे हादसे होने का खतरा और बढ़ जाता है।

स्थायी समाधान की उठी मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि हर वर्ष की अस्थायी मरम्मत की परंपरा समाप्त कर पुलिया और सड़क का स्थायी एवं गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराया जाए। उनका कहना है कि यह केवल आवागमन की सुविधा का विषय नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा और जीवन से जुड़ा गंभीर मामला है।

निष्कर्ष

कारीकोट–कुङकुङी कुवा मार्ग की बदहाल पुलिया एक ऐसी समस्या बन चुकी है, जो हर बरसात में ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बन जाती है। यदि समय रहते इस मार्ग का स्थायी निर्माण नहीं कराया गया, तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता। अब आवश्यकता केवल अस्थायी मरम्मत की नहीं, बल्कि ऐसी मजबूत व्यवस्था की है जो वर्षों तक लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा प्रदान कर सके।

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