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भारत–दक्षिण कोरिया संबंधों को नई गति: व्यापार, रक्षा और प्रौद्योगिकी सहयोग पर बढ़ा जोर

Jay Shankar

भारत और दक्षिण कोरिया ने अपनी विशेष रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। 24 जून 2026 को सियोल में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में भारत के विदेश मंत्री और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री ने दोनों देशों के बीच आर्थिक, सामरिक और तकनीकी सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने पर विस्तार से चर्चा की।

रणनीतिक साझेदारी को मिला नया आधार

यह वार्ता ऐसे समय में हुई जब अप्रैल 2026 में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने 2026-2030 की अवधि के लिए अपनी विशेष रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने का संकल्प व्यक्त किया था। सियोल में हुई बैठक उसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का प्रयास मानी जा रही है।

व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने पर सहमति

दोनों पक्षों ने आर्थिक सहयोग को और व्यापक बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने, निवेश के नए अवसरों को बढ़ावा देने और उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए ठोस उपायों पर विचार किया गया। दोनों देशों का मानना है कि आर्थिक साझेदारी भविष्य के संबंधों की प्रमुख आधारशिला होगी।

रक्षा और जहाज निर्माण में सहयोग का विस्तार

बैठक में रक्षा क्षेत्र और जहाज निर्माण उद्योग को सहयोग के महत्वपूर्ण क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया गया। समुद्री सुरक्षा, रक्षा उत्पादन तथा तकनीकी क्षमताओं के विकास के माध्यम से दोनों देश अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना चाहते हैं।

नई प्रौद्योगिकियों और स्टार्टअप क्षेत्र में अवसर

भारत और दक्षिण कोरिया ने फिनटेक, स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र तथा उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की। दोनों देशों का उद्देश्य नवाचार और डिजिटल अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में संयुक्त प्रयासों के माध्यम से नए अवसरों का सृजन करना है।

स्वच्छ ऊर्जा और हरित विकास पर विशेष ध्यान

ऊर्जा परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को देखते हुए दोनों देशों ने नवीकरणीय ऊर्जा, हरित प्रौद्योगिकी और स्वच्छ ऊर्जा समाधानों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। यह पहल सतत विकास के साझा लक्ष्य को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सांस्कृतिक और जन-जन के संबंधों को मिलेगा प्रोत्साहन

राजनीतिक और आर्थिक सहयोग के साथ-साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच संपर्क को भी मजबूत करने पर जोर दिया गया। शिक्षा, पर्यटन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपसी समझ और निकटता बढ़ाने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।

वैश्विक चुनौतियों पर साझा दृष्टिकोण

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में समान सोच वाले देशों के बीच सहयोग पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है। दोनों पक्षों ने एशिया और विश्व की बदलती परिस्थितियों तथा पश्चिम एशिया से जुड़ी आर्थिक चुनौतियों सहित विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।

आगे की रूपरेखा

भारत ने दक्षिण कोरियाई कंपनियों और निवेशकों को जोड़ने के लिए “कोरिया वीक” जैसे कार्यक्रम आयोजित किए हैं, जबकि दक्षिण कोरिया भी भारतीय उद्योग जगत के साथ संवाद को बढ़ावा देने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। 2026-2030 की संयुक्त रणनीतिक दृष्टि को लागू करने के लिए दोनों देशों के बीच नियमित संवाद और सहयोग को और गति देने पर सहमति बनी है।

निष्कर्ष

सियोल में हुई यह उच्चस्तरीय वार्ता भारत और दक्षिण कोरिया के बीच बढ़ते विश्वास और साझा हितों का प्रतीक है। व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा और सांस्कृतिक सहयोग जैसे विविध क्षेत्रों में बढ़ती भागीदारी आने वाले वर्षों में दोनों देशों की विशेष रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत तथा व्यापक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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