
भारत ऊर्जा आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए तेजी से जैव ईंधन (Biofuel) के उपयोग को बढ़ावा दे रहा है। इसी दिशा में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (Ethanol Blended Petrol – EBP) कार्यक्रम देश की सबसे महत्वपूर्ण पहलों में से एक बनकर उभरा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करना, कच्चे तेल के आयात में कमी लाना, प्रदूषण घटाना और किसानों के लिए आय के नए अवसर सृजित करना है।
वर्ष 2025-26 में भारत ने 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य निर्धारित समय से पाँच वर्ष पहले हासिल कर एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। यह उपलब्धि भारत की ऊर्जा सुरक्षा और हरित अर्थव्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।
एथेनॉल क्या है?
एथेनॉल एक स्वच्छ, नवीकरणीय और जैव-आधारित ईंधन है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने के रस, शीरे (Molasses), मक्का, टूटे हुए चावल तथा अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने से ईंधन अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनता है और कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है।
एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम का उद्देश्य
भारत सरकार ने एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को कई महत्वपूर्ण उद्देश्यों के साथ लागू किया है—
- ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना।
- कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना।
- विदेशी मुद्रा की बचत करना।
- ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी लाना।
- किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि उत्पादों का बेहतर मूल्य सुनिश्चित करना।
- स्वच्छ और टिकाऊ ईंधन को बढ़ावा देना।
- जैव ईंधन उद्योग एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना।
भारत में एथेनॉल मिश्रण की प्रगति
पिछले एक दशक में भारत ने एथेनॉल मिश्रण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।
- वर्ष 2013-14 में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण 1.5 प्रतिशत से भी कम था।
- वर्ष 2025-26 तक यह बढ़कर 20 प्रतिशत (E20) तक पहुँच गया।
- भारत ने यह लक्ष्य निर्धारित समय सीमा से पाँच वर्ष पहले प्राप्त कर लिया।
यह उपलब्धि नीति निर्माण, उद्योग, किसानों और तेल विपणन कंपनियों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।
एथेनॉल खरीद में रिकॉर्ड वृद्धि
एथेनॉल की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार ने खरीद व्यवस्था को मजबूत बनाया।
- 2013-14 में एथेनॉल की खरीद लगभग 38 करोड़ लीटर थी।
- 2025-26 में यह बढ़कर 1,200 करोड़ लीटर (अनुमानित) से अधिक हो गई।
इस बढ़ोतरी से एथेनॉल उद्योग में निवेश बढ़ा और किसानों को अपने उत्पादों के लिए अतिरिक्त बाजार उपलब्ध हुआ।
उत्पादन क्षमता में पाँच गुना विस्तार
देश में एथेनॉल उत्पादन क्षमता में भी अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है।
- वर्ष 2014 में कुल उत्पादन क्षमता लगभग 421 करोड़ लीटर थी।
- वर्ष 2026 तक यह बढ़कर लगभग 2,000 करोड़ लीटर हो गई।
नई डिस्टिलरी इकाइयों की स्थापना, आधुनिक तकनीकों का उपयोग और विभिन्न कृषि फसलों से एथेनॉल उत्पादन की अनुमति ने इस वृद्धि को संभव बनाया।
किसानों को होने वाले लाभ
एथेनॉल कार्यक्रम किसानों के लिए नई आर्थिक संभावनाएँ लेकर आया है।
मुख्य लाभ—
- गन्ना किसानों को समय पर भुगतान मिलने में सहायता।
- मक्का और अन्य अनाज उत्पादकों के लिए अतिरिक्त बाजार।
- कृषि अवशेषों एवं अधिशेष उत्पादन का बेहतर उपयोग।
- ग्रामीण क्षेत्रों में नए रोजगार के अवसर।
- कृषि आधारित उद्योगों का विस्तार।
इससे कृषि और उद्योग के बीच मजबूत संबंध विकसित हुए हैं।
ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती
भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है। एथेनॉल मिश्रण बढ़ने से—
- पेट्रोल की खपत में कमी आती है।
- कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटती है।
- अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के उतार-चढ़ाव का प्रभाव कम होता है।
- ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलता है।
पर्यावरणीय लाभ
एथेनॉल अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन माना जाता है।
इसके प्रमुख पर्यावरणीय लाभ हैं—
- ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी।
- कार्बन फुटप्रिंट घटाना।
- वायु प्रदूषण कम करना।
- स्वच्छ ऊर्जा को प्रोत्साहन।
- जलवायु परिवर्तन से निपटने में योगदान।
सरकार की प्रमुख नीतिगत पहल
एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को गति देने के लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं—
- एथेनॉल खरीद मूल्य में समय-समय पर संशोधन।
- विभिन्न फीडस्टॉक से एथेनॉल उत्पादन को अनुमति।
- नई डिस्टिलरी स्थापित करने हेतु वित्तीय सहायता।
- जैव ईंधन नीति के माध्यम से निवेश को प्रोत्साहन।
- तेल विपणन कंपनियों द्वारा दीर्घकालिक खरीद व्यवस्था।
प्रमुख उपलब्धियाँ
- 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण लक्ष्य समय से पहले हासिल।
- एथेनॉल खरीद में 30 गुना से अधिक वृद्धि।
- उत्पादन क्षमता लगभग पाँच गुना बढ़ी।
- विदेशी मुद्रा की उल्लेखनीय बचत।
- किसानों की आय के नए स्रोत विकसित हुए।
- जैव ईंधन उद्योग में बड़े पैमाने पर निवेश।
- पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति।
अक्सर व्यक्त की जाने वाली चिंताएँ
हालाँकि कार्यक्रम की व्यापक सफलता रही है, लेकिन कुछ चुनौतियाँ और चिंताएँ भी सामने आती हैं—
1. खाद्य सुरक्षा
यदि खाद्यान्न आधारित एथेनॉल उत्पादन अत्यधिक बढ़ता है, तो खाद्य उपलब्धता और कीमतों पर प्रभाव पड़ने की आशंका व्यक्त की जाती है।
2. जल उपयोग
गन्ना जैसी फसलें अधिक पानी की मांग करती हैं। इसलिए जल संरक्षण और फसल विविधीकरण पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
3. कच्चे माल की उपलब्धता
एथेनॉल उत्पादन के लिए पर्याप्त और टिकाऊ फीडस्टॉक उपलब्ध कराना एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
4. बुनियादी ढाँचा
भंडारण, परिवहन, मिश्रण और वितरण प्रणाली का लगातार विस्तार करना आवश्यक है।
5. वाहन अनुकूलता
हालाँकि अधिकांश आधुनिक वाहन E20 ईंधन के अनुरूप विकसित किए जा रहे हैं, लेकिन पुराने वाहनों के लिए तकनीकी अनुकूलन पर भी ध्यान देना होगा।
भविष्य की दिशा
भारत अब केवल 20 प्रतिशत मिश्रण तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि दूसरी पीढ़ी (2G) एथेनॉल, कृषि अपशिष्ट आधारित जैव ईंधन और उन्नत जैव ईंधन तकनीकों पर भी कार्य कर रहा है। इससे पराली और अन्य कृषि अवशेषों का बेहतर उपयोग होगा तथा स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को नई गति मिलेगी।
निष्कर्ष
एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम भारत की ऊर्जा, कृषि और पर्यावरण नीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है। वर्ष 2013-14 में 1.5 प्रतिशत से भी कम एथेनॉल मिश्रण से लेकर 2025-26 में 20 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य समय से पहले प्राप्त करना भारत की नीति, तकनीक और समन्वित प्रयासों की बड़ी सफलता है। उत्पादन क्षमता में पाँच गुना वृद्धि, एथेनॉल खरीद में रिकॉर्ड विस्तार, कच्चे तेल के आयात में कमी, विदेशी मुद्रा की बचत और किसानों के लिए नए आय स्रोत इस कार्यक्रम की प्रमुख उपलब्धियाँ हैं। आगे भी संतुलित नीति, टिकाऊ कृषि, जल संरक्षण और आधुनिक जैव ईंधन तकनीकों के माध्यम से भारत ऊर्जा आत्मनिर्भरता और हरित विकास की दिशा में अपनी प्रगति को और मजबूत कर सकता है।
