कीव: यूक्रेन की राजधानी कीव के पश्चिमी इलाके में स्थित मायला गांव में हुए रूसी हमले के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 38 हो गई है। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, हमले में कम से कम 52 लोग घायल हुए हैं, जबकि चार लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने इसे वर्ष 2026 में यूक्रेन पर हुआ अब तक का सबसे घातक रूसी हमला बताया है।
यह हमला शुक्रवार रात हुआ था। यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, कीव से लगभग 20 किलोमीटर दूर मायला गांव में एक भंडारण परिसर को रूसी ड्रोन ने निशाना बनाया। हमले के बाद वहां भीषण आग लग गई और उसके बाद लगातार विस्फोट होने लगे। घटनास्थल पर मौजूद आपातकालीन सेवाओं के लिए हालात बेहद चुनौतीपूर्ण रहे, क्योंकि विस्फोटों के कारण आसपास के इलाकों में भी आग और भारी नुकसान हुआ।
हमले के बाद लगातार होते रहे विस्फोट
यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की के अनुसार, जिस परिसर को निशाना बनाया गया, वहां गोला-बारूद और अन्य सैन्य सामग्री रखी हुई थी। शुरुआती हमले के बाद वहां मौजूद सामग्री में विस्फोट होने लगे, जिससे आग तेजी से आसपास के इलाकों तक फैल गई। कई घरों और अन्य इमारतों को नुकसान पहुंचा। बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
स्थानीय प्रशासन और आपातकालीन दलों ने आग पर काबू पाने तथा घटनास्थल को सुरक्षित बनाने के लिए अभियान चलाया। अधिकारियों को मलबे के बीच खतरनाक अवशेषों की मौजूदगी के कारण अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ी। जेलेंस्की ने बताया कि बचाव एवं सफाई अभियान जारी है और विस्फोटक अवशेषों को हटाने में समय लग सकता है।
चार लोग अब भी लापता
हमले के बाद राहत और बचाव अभियान के दौरान कई लोगों को सुरक्षित निकाला गया, लेकिन चार लोगों का अब तक पता नहीं चल पाया है। अधिकारियों को आशंका है कि मलबे और क्षतिग्रस्त ढांचों के कारण उनकी तलाश में मुश्किलें आ रही हैं।
घायलों की संख्या को लेकर शुरुआती रिपोर्टों में अलग-अलग आंकड़े सामने आए थे। बाद की जानकारी में कम से कम 52 लोगों के घायल होने की बात सामने आई, जबकि जेलेंस्की ने एक अलग अपडेट में 20 घायलों का उल्लेख किया था। ऐसे में राहत अभियान आगे बढ़ने के साथ आंकड़ों में बदलाव संभव है।
आवासीय इलाकों तक पहुंचा नुकसान
हमले का सबसे गंभीर पहलू यह रहा कि विस्फोटों और आग का प्रभाव आसपास के रिहायशी इलाकों तक पहुंचा। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार कई घरों और इमारतों को नुकसान हुआ। एक बुजुर्ग एवं दिव्यांग लोगों की देखभाल करने वाली संस्था भी प्रभावित हुई और इलाके से सैकड़ों लोगों को बाहर निकाला गया।
इस घटना ने यूक्रेन में सैन्य सामग्री के भंडारण और नागरिक आबादी की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जेलेंस्की ने कहा कि सैन्य सामग्री को आवासीय क्षेत्रों के इतने करीब नहीं रखा जाना चाहिए था। उन्होंने इस मामले में अधिकारियों की संभावित लापरवाही की जांच की घोषणा भी की है।
यूक्रेन ने जांच शुरू की
यूक्रेनी अभियोजकों ने इस घटना की परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है। जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना है कि सैन्य सामग्री को उस स्थान पर क्यों रखा गया था और क्या निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था।
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने संकेत दिया है कि यदि जांच में किसी अधिकारी या संस्था की गंभीर लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यूक्रेनी नेतृत्व का कहना है कि युद्ध की परिस्थितियों में भी सैन्य प्रतिष्ठानों और संवेदनशील सामग्री की सुरक्षा के साथ-साथ आसपास रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।
रूस ने हमले को लेकर क्या कहा?
रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उसके हमले का निशाना यूक्रेन से जुड़ी सैन्य सामग्री का भंडारण केंद्र था। रूसी पक्ष ने इसे सैन्य उद्देश्य से जुड़ा ठिकाना बताया है। हालांकि, यूक्रेन ने इस हमले में नागरिकों की मौत और आसपास के रिहायशी क्षेत्रों में हुए नुकसान को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
इस घटनाक्रम के बीच दोनों देशों के बीच हवाई हमलों का सिलसिला लगातार तेज होता दिखाई दे रहा है। यूक्रेनी राष्ट्रपति के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में रूस ने यूक्रेन के विभिन्न हिस्सों पर बड़ी संख्या में ड्रोन, बम और मिसाइलें इस्तेमाल की हैं। इससे यूक्रेन की वायु रक्षा व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ा है।
रूस की नई चेतावनी से बढ़ी चिंता
मायला हमले के बाद रूस के रक्षा मंत्रालय ने यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे पर बड़े हमलों की तैयारी की चेतावनी दी है। मॉस्को ने इसे यूक्रेन की ओर से रूस के ऊर्जा और अन्य बुनियादी ढांचे पर किए जा रहे ड्रोन हमलों की प्रतिक्रिया बताया है
इस चेतावनी ने आने वाले महीनों को लेकर यूक्रेन में चिंता बढ़ा दी है। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के दौरान ऊर्जा ढांचा पहले भी लगातार हमलों का केंद्र रहा है। सर्दियों के दौरान बिजली और गर्मी की आपूर्ति बाधित होने से आम नागरिकों को विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
बढ़ते हवाई हमलों से नागरिकों पर दबाव
कीव और उसके आसपास के क्षेत्रों में हाल के दिनों में हवाई हमलों की तीव्रता बढ़ी है। लगातार बजते एयर-रेड अलार्म, ड्रोन हमले और विस्फोटों ने आम नागरिकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। युद्ध के इतने लंबे समय बाद भी नागरिक आबादी को सुरक्षा की अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।
मायला की घटना इस बात का उदाहरण है कि किसी सैन्य लक्ष्य पर हमला किस तरह आसपास के नागरिक क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा सकता है। विशेष रूप से तब, जब संवेदनशील सैन्य सामग्री नागरिक बस्तियों के निकट मौजूद हो।
युद्ध में एक और भयावह मोड़
रूस-यूक्रेन युद्ध को साढ़े चार साल से अधिक समय हो चुका है, लेकिन शांति की दिशा में निर्णायक प्रगति अब भी कठिन दिखाई दे रही है। इसी बीच हवाई हमलों की बढ़ती संख्या ने युद्ध को एक बार फिर गंभीर मोड़ पर ला दिया है।
मायला में 38 लोगों की मौत केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि यह उन परिवारों की त्रासदी है जिन्होंने अपने परिजनों को खोया है। घायलों का इलाज चल रहा है और लापता लोगों की तलाश जारी है। राहतकर्मी घटनास्थल को सुरक्षित बनाने और प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने में जुटे हैं।
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने हमले के लिए जिम्मेदारी तय करने और हर रूसी हमले का जवाब देने की बात कही है। दूसरी ओर, रूस की ओर से भी आने वाले दिनों में बड़े हमलों की चेतावनी दी गई है। ऐसे में इस घटना ने युद्ध के और अधिक बढ़ने तथा नागरिकों के लिए खतरा बढ़ने की आशंका पैदा कर दी है।
निष्कर्ष
कीव के पश्चिम में मायला गांव पर हुआ हमला यूक्रेन में 2026 का अब तक का सबसे घातक रूसी हमला बन गया है। 38 लोगों की मौत, दर्जनों घायलों और चार लोगों के लापता होने ने इस युद्ध की मानवीय कीमत को एक बार फिर सामने ला दिया है।
हमले की जांच अब इस बात पर भी केंद्रित है कि सैन्य सामग्री को नागरिक आबादी के इतने करीब क्यों रखा गया था। साथ ही, रूस की ओर से ऊर्जा ढांचे पर संभावित बड़े हमलों की चेतावनी ने आने वाले समय को लेकर चिंता बढ़ा दी है। युद्ध का समाधान सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक प्रयासों से निकले—यही उम्मीद अब भी यूक्रेन और पूरे क्षेत्र के लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बनी हुई है।
