Site icon हिट एंड हॉट न्यूज़

शराब के ठेकों से फैलता कचरा: ग्रामीण खेतों के लिए बढ़ता खतरा, किसानों की मुश्किलें गहराईं

अमृतपाल बहराइच

रिपोर्टर हिट एंड हॉट न्यूज़

ग्रामीण इलाकों में शराब के ठेकों के आसपास फैली खाली कांच की बोतलें, टूटे हुए शीशे और प्लास्टिक का कचरा अब केवल सफाई का विषय नहीं रह गया है। यह समस्या धीरे-धीरे किसानों, खेतिहर मजदूरों और पूरे गांव के लिए चिंता का कारण बनती जा रही है। खेतों की मेड़ों, संपर्क मार्गों और श्मशान घाटों के आसपास बिखरा यह कचरा खेती-किसानी के साथ-साथ ग्रामीण जीवन की सुरक्षा पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है।

खेतों में काम करने वालों के लिए बढ़ा जोखिम

धान, गन्ना और अन्य फसलों की खेती करने वाले किसान अक्सर पानी और कीचड़ से भरे खेतों में लंबे समय तक काम करते हैं। ऐसे में यदि खेतों या रास्तों पर टूटे हुए कांच के टुकड़े पड़े हों तो उनके पैरों में गंभीर चोट लगने की आशंका बनी रहती है। कई बार छोटे घाव भी संक्रमण का रूप ले लेते हैं, जिससे इलाज का खर्च बढ़ता है और काम प्रभावित होता है।

खेती की लागत पर पड़ रहा अतिरिक्त बोझ

खेती के लिए ट्रैक्टर, ट्रॉली और अन्य कृषि वाहन रोजाना खेतों तक आते-जाते हैं। यदि रास्तों पर कांच फैला हो तो टायर खराब होने या पंचर होने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। इससे किसानों को अनावश्यक खर्च उठाना पड़ता है और खेती के कार्य में भी देरी होती है।

शिकायतों के बावजूद नहीं निकल रहा समाधान

ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या की जानकारी कई बार संबंधित अधिकारियों और ठेका संचालकों तक पहुंचाई गई, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो पाया। अक्सर जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डाल दी जाती है, जबकि कचरा लगातार बढ़ता रहता है। परिणामस्वरूप ग्रामीणों को ही इसकी कीमत चुकानी पड़ती है।

पर्यावरण और सामाजिक जीवन पर असर

खुले में पड़ी कांच की बोतलें और प्लास्टिक का कचरा मिट्टी की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं तथा आसपास का वातावरण भी अस्वच्छ बनाते हैं। श्मशान घाटों और सार्वजनिक स्थानों पर फैला यह कचरा गांव की छवि को भी खराब करता है। इसके अलावा रात के समय ऐसे स्थानों पर असामाजिक गतिविधियों की आशंका भी बढ़ जाती है, जिससे लोगों में असुरक्षा की भावना पैदा होती है।

https://hi.hitandhotnews.com/wp-content/uploads/2026/07/VID-20260706-WA0016.mp4

क्या हो सकते हैं प्रभावी उपाय?

निष्कर्ष

ग्रामीण क्षेत्रों में शराब के ठेकों से फैलने वाला कचरा केवल सफाई का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह किसानों की सुरक्षा, खेती की लागत, पर्यावरण संरक्षण और गांव के सामाजिक वातावरण से जुड़ा गंभीर विषय है। यदि प्रशासन, ठेका संचालक और स्थानीय समुदाय मिलकर जिम्मेदारी निभाएं, तो इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। स्वच्छ और सुरक्षित ग्रामीण परिवेश ही किसानों की मेहनत और सम्मान की वास्तविक रक्षा कर सकता है।

Exit mobile version