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⚖️मासूम को इंसाफ, दरिंदे को 20 साल की सख्त सजा: बरेली कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला बना अपराधियों के लिए कड़ा संदेश

बरेली।
मासूम बच्चों के खिलाफ होने वाले जघन्य अपराधों पर कठोर कार्रवाई का एक और मजबूत उदाहरण सामने आया है। बरेली की विशेष पॉक्सो अदालत ने पांच वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म करने वाले दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाकर यह स्पष्ट कर दिया है कि मासूमों की अस्मिता से खिलवाड़ करने वालों के लिए कानून में किसी प्रकार की नरमी की कोई गुंजाइश नहीं है। अदालत ने दोषी पर 32 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

यह मामला वर्ष 2023 का है, जब आरोपी ने एक मासूम बच्ची को खाने का सामान दिलाने का लालच देकर अपने साथ ले गया और उसके साथ घिनौना अपराध किया। घटना के बाद बरेली पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया और वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ मजबूत विवेचना कर अदालत में प्रभावी ढंग से पक्ष रखा।

सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष की कठोर कैद की सजा सुनाई। साथ ही 32 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। अदालत ने आदेश दिया कि जुर्माने की आधी राशि पीड़ित बच्ची को आर्थिक सहायता के रूप में दी जाएगी। यदि दोषी जुर्माना जमा नहीं करता है, तो उसे छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

इस मामले में बरेली पुलिस की प्रभावी जांच और मजबूत पैरवी ने न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उत्तर प्रदेश पुलिस के ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत साक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से अदालत में प्रस्तुत किया गया, जिससे मुकदमे का शीघ्र निस्तारण संभव हो सका।

यह फैसला केवल एक अपराधी को सजा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को यह स्पष्ट संदेश भी देता है कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। मासूमों के खिलाफ अपराध करने वालों को कानून के शिकंजे से बचने का कोई अवसर नहीं मिलेगा। ऐसे मामलों में त्वरित और कठोर न्याय समाज का विश्वास मजबूत करता है तथा अपराधियों में कानून का भय पैदा करता है।

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