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✨‌ बाल श्रम: एक अभिशाप, जिसे जड़ से मिटाना होगा


Anoop singh

हर वर्ष 12 जून को “विश्व बाल श्रम निषेध दिवस” मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य समाज में बाल श्रम के प्रति जागरूकता फैलाना और इससे प्रभावित बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना है। इस वर्ष, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर एक सशक्त संदेश साझा करते हुए कहा, “बाल श्रम अभिशाप है, इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता!”

मुख्यमंत्री ने समाज से आह्वान किया कि वे इस दिन को केवल प्रतीकात्मक रूप से नहीं, बल्कि एक संकल्प के रूप में लें — हर बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान और संस्कार के साथ जोड़ने का संकल्प।

🛑 क्या है बाल श्रम?

बाल श्रम वह स्थिति है जिसमें 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से शारीरिक या मानसिक श्रम करवाया जाता है, जिससे उनका बाल्यकाल, शिक्षा और मानसिक विकास बाधित होता है। यह न केवल उनके अधिकारों का हनन है, बल्कि समाज के भविष्य पर भी सीधा आघात है।

📢 सरकार का संकल्प और संदेश

योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि केवल जागरूकता ही नहीं, बल्कि सक्रिय सहयोग की भावना से समाज को आगे आना होगा। उन्होंने कहा:

“बाल श्रम के विरुद्ध जागरूकता और सहयोग से ही हम एक संवेदनशील, सशक्त समाज के भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।”

इसके साथ उन्होंने यह भी अपील की कि हम बच्चों के अधिकारों और हितों की रक्षा हेतु एकजुट हों और ऐसे हर प्रयास का समर्थन करें जो बच्चों को शिक्षा के पथ पर अग्रसर करें।

🎯 क्या करें हम?

🌱 शिक्षा ही सशक्तिकरण है

एक बच्चा स्कूल में जब किताबें पढ़ता है, तो वह अपने भविष्य को उज्ज्वल करता है। लेकिन वही बच्चा जब मजदूरी करता है, तो उसका बचपन अंधकार में खो जाता है। एक शिक्षित बच्चा न केवल अपने लिए, बल्कि राष्ट्र के लिए भी एक उम्मीद बनता है।

🔚 निष्कर्ष

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि एक आंदोलन है — एक ऐसे भारत के निर्माण की दिशा में, जहाँ हर बच्चा मुस्कुराते हुए स्कूल जाए, न कि बोझ उठाते हुए काम पर। आइए, मिलकर बाल श्रम को जड़ से समाप्त करें और बच्चों को उनका अधिकार — एक सुरक्षित, शिक्षित और सम्मानजनक जीवन — लौटाएं।

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