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🇮🇳 टीबी मुक्त भारत की ओर निर्णायक कदम: जेपी नड्डा का बड़ा आह्वान, युवा शक्ति बनेगी बदलाव की सबसे बड़ी ताकत

नई दिल्ली: भारत को वर्ष 2025 तक टीबी (तपेदिक) मुक्त बनाने के लक्ष्य को गति देने के लिए केंद्र सरकार ने अपने प्रयास और तेज कर दिए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ को जन-जन तक पहुंचाने और इसे राष्ट्रव्यापी जन-आंदोलन का स्वरूप देने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ युवा मामले एवं खेल मंत्रालय, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय तथा रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया।

🩺 टीबी के खिलाफ निर्णायक जंग

बैठक के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि तपेदिक केवल एक स्वास्थ्य चुनौती नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा भी है। उन्होंने सभी मंत्रालयों से समन्वित प्रयास करने का आह्वान करते हुए कहा कि जब सरकार, समाज और युवा मिलकर आगे बढ़ेंगे, तभी भारत टीबी जैसी गंभीर बीमारी पर निर्णायक विजय प्राप्त कर सकेगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि टीबी के खिलाफ लड़ाई केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे गांव-गांव और शहर-शहर तक जनभागीदारी के माध्यम से पहुंचाना होगा।

👨‍🎓 युवा शक्ति बनेगी अभियान की सबसे बड़ी ताकत

जेपी नड्डा ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका युवा वर्ग है। यदि युवाओं की ऊर्जा, जागरूकता और सामाजिक भागीदारी को इस अभियान से जोड़ा जाए तो टीबी मुक्त भारत का सपना जल्द साकार हो सकता है।

उन्होंने युवाओं, स्वयंसेवी संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों, एनसीसी कैडेट्स और सामाजिक संस्थाओं से आगे आकर लोगों को टीबी की पहचान, समय पर जांच और उपचार के प्रति जागरूक करने की अपील की।

📊 अभियान के प्रभावशाली परिणाम

दिसंबर 2024 में शुरू हुए अभियान के बाद देशभर में बड़े पैमाने पर टीबी जांच अभियान चलाया गया है। अब तक 28 करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिसके माध्यम से 39 लाख से अधिक टीबी मरीजों की पहचान हुई है।

इनमें लगभग 12.93 लाख ऐसे मरीज भी शामिल हैं, जिनमें बीमारी के स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं दे रहे थे। समय रहते इन मामलों की पहचान होने से उपचार शुरू करना संभव हुआ है, जिससे संक्रमण के प्रसार को रोकने में मदद मिलेगी।

🏢 कार्यस्थलों से गांवों तक पहुंचेगा अभियान

बैठक में निर्णय लिया गया कि टीबी जांच और जागरूकता अभियान को कार्यस्थलों, औद्योगिक इकाइयों, सरकारी संस्थानों और सामुदायिक स्तर तक व्यापक रूप से पहुंचाया जाएगा।

स्वास्थ्य मंत्री ने विभिन्न मंत्रालयों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने विभागों के माध्यम से नियमित स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित करें और कर्मचारियों के बीच टीबी जांच को बढ़ावा दें, ताकि बीमारी की समय रहते पहचान हो सके।

🪖 एनसीसी और रक्षा बल निभाएंगे अहम भूमिका

अभियान को अधिक प्रभावी बनाने के लिए रक्षा मंत्रालय और एनसीसी कैडेट्स की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। रक्षा कर्मी और एनसीसी स्वयंसेवक देशभर में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को टीबी के लक्षण, बचाव, जांच और मुफ्त उपचार की जानकारी देंगे।

सरकार का मानना है कि अनुशासित और संगठित युवा नेटवर्क के माध्यम से यह संदेश देश के दूरदराज़ क्षेत्रों तक तेजी से पहुंचाया जा सकता है।

🤝 जनभागीदारी से ही मिलेगा लक्ष्य

विशेषज्ञों का मानना है कि टीबी जैसी बीमारी पर पूरी तरह नियंत्रण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है। इसके लिए समाज, परिवार, स्वास्थ्यकर्मियों, शिक्षकों, स्वयंसेवी संगठनों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

समय पर जांच, नियमित दवा, संतुलित पोषण और जागरूकता ही टीबी उन्मूलन की सबसे प्रभावी रणनीति है।

📌 निष्कर्ष

टीबी मुक्त भारत अभियान केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि स्वस्थ, सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का राष्ट्रीय संकल्प है। करोड़ों लोगों की स्क्रीनिंग, लाखों मरीजों की समय पर पहचान और युवाओं की बढ़ती भागीदारी इस दिशा में सकारात्मक संकेत हैं। यदि सरकार, समाज और युवा मिलकर इसी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ते रहे, तो वह दिन दूर नहीं जब भारत तपेदिक जैसी गंभीर बीमारी पर स्थायी विजय प्राप्त कर दुनिया के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करेगा।

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