
नई दिल्ली: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने ‘हूल दिवस’ के अवसर पर संथाल क्रांति के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि जनजातीय अस्मिता, स्वाभिमान और मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीरों का बलिदान सदैव देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा।
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि सिदो-कान्हू मुर्मू, चांद-भैरव तथा वीरांगनाएं फूलो-झानो ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष का ऐसा बिगुल फूंका, जिसने पूरे देश में आज़ादी और आत्मसम्मान की चेतना को नई दिशा दी। उनके साहस और बलिदान ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूती प्रदान की।
क्या है हूल दिवस?
हूल दिवस हर वर्ष 30 जून को मनाया जाता है। यह दिन 1855 के संथाल हूल (विद्रोह) की याद में समर्पित है, जब संथाल समुदाय ने अंग्रेजी हुकूमत, जमींदारी शोषण और अन्यायपूर्ण नीतियों के खिलाफ ऐतिहासिक विद्रोह का नेतृत्व किया था। यह आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के शुरुआती और सबसे महत्वपूर्ण जनआंदोलनों में से एक माना जाता है।
अमित शाह का संदेश
अपने संदेश में अमित शाह ने कहा कि—
- जनजातीय समाज के बलिदानों को राष्ट्र कभी नहीं भूल सकता।
- संथाल क्रांति के वीरों ने स्वतंत्रता और स्वाभिमान की रक्षा के लिए असाधारण साहस का परिचय दिया।
- उनका संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति और आत्मसम्मान की प्रेरणा देता रहेगा।
हूल दिवस का महत्व
- आदिवासी इतिहास और संस्कृति के गौरव का प्रतीक।
- स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज के योगदान को सम्मान।
- युवाओं में राष्ट्रभक्ति और सामाजिक न्याय की भावना का संचार।
- शहीदों के बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर।
निष्कर्ष
हूल दिवस केवल एक स्मृति दिवस नहीं, बल्कि उन अमर वीरों के अद्वितीय साहस, त्याग और देशभक्ति का प्रतीक है जिन्होंने अन्याय के सामने कभी घुटने नहीं टेके। अमित शाह का श्रद्धांजलि संदेश देश को यह याद दिलाता है कि भारत की आज़ादी की नींव में जनजातीय समाज के अनगिनत बलिदानों का अमूल्य योगदान शामिल है। ऐसे वीरों का इतिहास सदैव राष्ट्र को प्रेरित करता रहेगा।
