
भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक हस्तशिल्प एक बार फिर वैश्विक मंच पर चमक उठा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी को मुरादाबाद की पीतल से निर्मित हस्तनिर्मित कछुआ (Brass Tortoise) भेंट किए जाने के बाद उत्तर प्रदेश की प्रसिद्ध पीतल कला अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गई है। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व और ‘न्यू उत्तर प्रदेश’ की वैश्विक पहचान का प्रतीक बताया।
मुख्य बिंदु
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेशेल्स के राष्ट्रपति को मुरादाबाद की पीतल कला से बना विशेष कछुआ भेंट किया।
- यह उपहार भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और कारीगरों की अद्भुत शिल्पकला का प्रतीक है।
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे ‘न्यू उत्तर प्रदेश’ की वैश्विक पहचान का महत्वपूर्ण क्षण बताया।
- मुरादाबाद की पीतल कला को विश्वभर में उत्कृष्ट हस्तशिल्प के रूप में पहचान प्राप्त है।
- इस पहल से स्थानीय कारीगरों और हस्तशिल्प उद्योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
विश्व मंच पर भारतीय संस्कृति की चमक
प्रधानमंत्री द्वारा विदेशी राष्ट्राध्यक्ष को भारतीय हस्तशिल्प से निर्मित उपहार देना केवल एक औपचारिक कूटनीतिक परंपरा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक शक्ति, कला और आत्मनिर्भरता का प्रभावशाली संदेश भी है। मुरादाबाद की पीतल कला ने एक बार फिर साबित किया कि भारतीय कारीगरों की प्रतिभा विश्व स्तर पर सम्मान पाने की क्षमता रखती है।
योगी आदित्यनाथ का संदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रेरणादायी नेतृत्व और ‘न्यू उत्तर प्रदेश’ की विकास यात्रा का परिणाम है। उन्होंने कहा कि राज्य के कारीगर आज अपनी मेहनत, कौशल और नवाचार के दम पर वैश्विक बाजार में नई पहचान बना रहे हैं।
मुरादाबाद क्यों है खास?
मुरादाबाद को ‘ब्रास सिटी’ (पीतल नगरी) के नाम से जाना जाता है। यहां के कारीगर पीढ़ियों से पीतल की उत्कृष्ट कलाकृतियां, सजावटी वस्तुएं और हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार करते आए हैं। इन उत्पादों की मांग यूरोप, अमेरिका, मध्य-पूर्व और अन्य कई देशों में लगातार बढ़ रही है।
कारीगरों के लिए नई उम्मीद
प्रधानमंत्री द्वारा मुरादाबाद की कलाकृति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किए जाने से स्थानीय कारीगरों का उत्साह बढ़ा है। इससे भारतीय हस्तशिल्प के निर्यात को नई गति मिलने और ‘वोकल फॉर लोकल’ तथा ‘मेक इन इंडिया’ जैसे अभियानों को भी मजबूती मिलने की संभावना है।
निष्कर्ष
मुरादाबाद की पीतल कला केवल एक हस्तशिल्प नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, कारीगरों की मेहनत और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का जीवंत प्रतीक है। प्रधानमंत्री द्वारा इसे वैश्विक मंच पर सम्मानपूर्वक प्रस्तुत करना भारतीय शिल्पकला की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा और उत्तर प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य का सशक्त संदेश है।
