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🌧️ ग्रेटर नोएडा में बड़ा हादसा टला: खुले गटर में गिरा 10 वर्षीय मासूम, ARTO राजेश मोहन ने जान पर खेलकर बचाई जिंदगी

ग्रेटर नोएडा। बारिश के मौसम में लापरवाही किस तरह जानलेवा साबित हो सकती है, इसका दर्दनाक उदाहरण ग्रेटर नोएडा में देखने को मिला। यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के पास जलभराव के बीच सड़क किनारे पैदल जा रहा एक 10 वर्षीय मासूम अचानक खुले गटर में गिर गया। कुछ ही क्षणों में घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई और बच्चे की मां की चीख-पुकार से माहौल दहल उठा।

स्थिति की गंभीरता को समझते हुए मौके पर मौजूद ARTO राजेश मोहन और उनकी टीम ने बिना एक पल गंवाए राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया। सबसे पहले स्वयं राजेश मोहन गहरे गटर में उतरे और अपनी जान की परवाह किए बिना बच्चे तक पहुंचे। टीम के सहयोग से उन्होंने मासूम को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। उनकी त्वरित सूझबूझ, साहस और मानवता ने एक अनमोल जीवन बचा लिया।

यह घटना केवल एक सफल रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल भी खड़े करती है। शहर में खुले गटर, टूटी सुरक्षा व्यवस्था और बरसात के दौरान जलभराव जैसी समस्याएं लगातार लोगों की जान जोखिम में डाल रही हैं। यदि समय रहते सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता, तो शायद यह हादसा होता ही नहीं।

स्थानीय लोगों ने भी इस घटना के बाद प्रशासन से मांग की है कि खुले गटरों को तत्काल ढका जाए, जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए और संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए। नागरिकों का कहना है कि हर वर्ष बरसात के मौसम में ऐसी लापरवाहियां बड़े हादसों को न्योता देती हैं।

इस साहसिक कार्य के लिए ARTO राजेश मोहन और उनकी टीम की हर ओर सराहना हो रही है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि सच्चा अधिकारी वही होता है जो संकट की घड़ी में केवल आदेश नहीं देता, बल्कि स्वयं आगे बढ़कर लोगों की जान बचाने का साहस दिखाता है। उनका यह कदम कर्तव्यनिष्ठा, संवेदनशीलता और मानवता का प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।

हालांकि इस घटना ने एक महत्वपूर्ण संदेश भी दिया है कि केवल किसी बहादुर अधिकारी के भरोसे सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती। प्रशासन को शहरी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने, खुले गटरों को तत्काल बंद कराने और नागरिकों की सुरक्षा के लिए ठोस एवं स्थायी कदम उठाने होंगे। साथ ही, बरसात के मौसम में लोगों को भी जलभराव वाले क्षेत्रों से गुजरते समय विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।

ग्रेटर नोएडा की यह घटना एक चेतावनी है कि छोटी-सी लापरवाही भी किसी परिवार की खुशियां छीन सकती है। राहत की बात यह रही कि इस बार एक बहादुर अधिकारी की तत्परता ने मासूम की जिंदगी बचा ली। अब जरूरत इस बात की है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जिम्मेदार एजेंसियां समय रहते प्रभावी कार्रवाई करें, ताकि भविष्य में किसी और बच्चे की जिंदगी इस तरह खतरे में न पड़े।

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