भारतीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने हाल ही में कल्याण कर्नाटक के सात प्रमुख जिलों का दौरा किया। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य किसानों, स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों से संवाद करना और कृषि प्रसंस्करण को बढ़ावा देना था, ताकि स्थानीय उत्पादों का मूल्यवर्धन कर उन्हें बड़े बाज़ार तक पहुँचाया जा सके।
🏭 MPLADS निधि से स्थापित प्रसंस्करण केंद्र
वित्त मंत्री ने सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) के अंतर्गत सात जिलों में कृषि प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना की। हर केंद्र को उस जिले के प्रमुख कृषि उत्पादों के अनुसार विकसित किया गया है। जिला प्रमुख उत्पाद और क्षमता विजयनगर मूंगफली बटर, भुनी मूंगफली, चिकी, इमली गूदा (200 किग्रा मूंगफली, 200 किग्रा इमली) बल्लारी मिर्च फ्लेक्स और पाउडर (250 किग्रा मिर्च) कोप्पल फलों का गूदा, जूस, आमचूर पाउडर (500 किग्रा फल) यादगिर चिला प्रीमिक्स, चना और तुअर दाल मिल (350 किग्रा दाल) रायचूर मूंगफली बटर, भुनी मूंगफली, मूंगफली तेल (300 किग्रा) कलबुर्गी बाजरा फ्लेक्स, पॉप्स, आटा, रेडी-टू-ईट फूड (500 किग्रा बाजरा) बीदर सोया टोफू और फ्लेवर्ड सोया मिल्क (300 किग्रा सोयाबीन)
🚜 किसानों से प्रत्यक्ष संवाद और नवाचार
दौरे के दौरान श्रीमती सीतारमण ने स्थानीय किसानों और स्वयं सहायता समूहों से सीधे संवाद किया। उन्होंने प्रसंस्करण केंद्रों का निरीक्षण किया और यह जाना कि ये केंद्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कैसे सशक्त बना सकते हैं। इससे न केवल किसानों की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे।
🌱 आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मजबूत कदम
इन प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना से स्थानीय कृषि उत्पादों का मूल्यवर्धन होगा और ग्रामीण उद्यमिता को भी बढ़ावा मिलेगा। यह मॉडल न केवल कर्नाटक के लिए, बल्कि देश के अन्य हिस्सों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है।
✨ निष्कर्ष
निर्मला सीतारमण की यह पहल कल्याण कर्नाटक के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है। स्थानीय संसाधनों का उपयोग करते हुए प्रसंस्करण के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाना एक दूरदर्शी कदम है, जो आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
