
30 जून को केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित व्यापार सुधारों की समयसीमा पूरी होने के बीच कई राज्यों में सुधार कार्यों की प्रगति अपेक्षा से धीमी रही। विशेष रूप से श्रम (Labour) और आबकारी (Excise) विभागों में सुधारों की रफ्तार कम रहने से नीति क्रियान्वयन को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
🔹 आज समाप्त हो रही महत्वपूर्ण समयसीमा
केंद्र सरकार ने व्यापारिक माहौल को बेहतर बनाने और निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्यों को 30 जून तक कई सुधार लागू करने का लक्ष्य दिया था।
🔹 श्रम विभाग में धीमी प्रगति
कई राज्यों में श्रम कानूनों से जुड़ी ऑनलाइन सेवाएं, लाइसेंस प्रक्रिया और निरीक्षण प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल बनाने का कार्य समय पर पूरा नहीं हो सका।
🔹 आबकारी विभाग भी पीछे
आबकारी से संबंधित अनुमति, लाइसेंस और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में कई राज्यों की प्रगति अपेक्षाकृत धीमी रही, जिससे निर्धारित लक्ष्य प्रभावित हुए।
🔹 व्यापार सुगमता पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि सुधारों में देरी से Ease of Doing Business को बढ़ावा देने के प्रयासों की गति प्रभावित हो सकती है और नए निवेश आकर्षित करने में चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
🔹 केंद्र ने दिए सुधार तेज करने के संकेत
केंद्र सरकार राज्यों के प्रदर्शन की समीक्षा कर रही है और जिन क्षेत्रों में प्रगति धीमी है, वहां सुधारों को जल्द पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है।
निष्कर्ष
व्यापार सुधारों की यह समयसीमा भारत में पारदर्शी, तेज़ और निवेश-अनुकूल कारोबारी वातावरण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि राज्य लंबित सुधारों को कितनी तेजी से पूरा कर देश की आर्थिक प्रगति और निवेश माहौल को नई गति देते हैं।
