📍 वाशिंगटन डी.सी., 2 अगस्त 2025
अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर सरकारी संस्थानों की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए श्रम सांख्यिकी ब्यूरो (BLS) की आयुक्त एरिका मैकएन्टरफर को उनके पद से हटा दिया है। ट्रम्प ने दावा किया कि जुलाई माह की रोज़गार रिपोर्ट में “जानबूझकर गड़बड़ी” की गई, ताकि अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति को छिपाया जा सके और रिपब्लिकन पार्टी को चुनावी नुकसान पहुंचे।
🗣️ ट्रम्प का बयान: “यह डेटा हेरफेरी है, गलती नहीं”
ट्रुथ सोशल पर जारी अपने बयान में ट्रम्प ने कहा:
“अमेरिकी जनता के साथ धोखा किया गया है। ये आंकड़े वास्तविकता को छिपाने और प्रशासनिक विफलताओं को छुपाने का एक प्रयास हैं। BLS की प्रमुख ने इस घोटाले को अंजाम देने में भूमिका निभाई है।”
उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की रिपोर्ट्स का उद्देश्य आगामी राष्ट्रपति चुनावों को प्रभावित करना है।
📊 जुलाई की रोजगार रिपोर्ट: आंकड़े क्या कहते हैं?
जुलाई 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अर्थव्यवस्था में केवल 73,000 नई नौकरियां जोड़ी गईं — जबकि अनुमान था कि यह संख्या 1.5 लाख से अधिक हो सकती है। इससे भी अधिक चिंता की बात यह रही कि मई और जून के आंकड़ों को संशोधित कर 2.58 लाख नौकरियों की कटौती दर्शाई गई।
यह गिरावट महामारी के बाद सबसे कमजोर तिमाही वृद्धि मानी जा रही है।
📚 विशेषज्ञों की राय: क्या यह सामान्य प्रक्रिया है?
अर्थशास्त्रियों और श्रम डेटा विशेषज्ञों का मानना है कि BLS का डेटा दो बार संशोधित किया जाता है, और यह प्रक्रिया पारदर्शी और सांख्यिकीय मॉडल पर आधारित होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रारंभिक डेटा अक्सर अधूरे होते हैं, जिन्हें सीज़नल समायोजन और बेंचमार्क रिवीजन के तहत अपडेट किया जाता है।
🛑 राजनीतिक विवाद या प्रशासनिक सुधार?
कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रम्प का यह कदम चुनाव से पहले एक राजनीतिक रणनीति हो सकता है, जिससे वे यह संदेश देना चाहते हैं कि सरकारी एजेंसियां डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रभाव में काम कर रही हैं। वहीं, ट्रम्प समर्थकों ने इसे “साहसिक निर्णय” बताया है।
📌 आगे क्या?
व्हाइट हाउस या BLS की ओर से अभी तक ट्रम्प के आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, यह घटना आने वाले चुनावी महीनों में रोजगार डेटा को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर सकती है।
📎 निष्कर्ष:
ट्रम्प द्वारा श्रम सांख्यिकी ब्यूरो की प्रमुख को हटाना एक गंभीर और असाधारण प्रशासनिक हस्तक्षेप है। जहां एक ओर यह प्रश्न उठाता है कि क्या सरकारी आंकड़ों में निष्पक्षता बची है, वहीं दूसरी ओर यह अमेरिका के डेटा आधारित प्रशासन की साख पर भी सवाल खड़े करता है।
