Site icon HIT AND HOT NEWS

🧑‍⚖️ दिल्ली हाईकोर्ट के जज ने संजय भंडारी की याचिका पर सुनवाई से खुद को किया अलग: क्या है मामला?


📅 दिनांक: 31 जुलाई, 2025 | स्थान: नई दिल्ली

दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति गिरीश कटपालिया ने एक संवेदनशील मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया है। यह मामला ब्रिटेन में रहने वाले रक्षा सौदों से जुड़े सलाहकार संजय भंडारी से जुड़ा है, जिन्हें हाल ही में भारत की एक विशेष अदालत ने “भगोड़ा आर्थिक अपराधी” (Fugitive Economic Offender) घोषित किया है। यह निर्णय आर्थिक अपराधियों से जुड़े FEO अधिनियम, 2018 के अंतर्गत लिया गया था।

⚖️ क्या है मामला?

संजय भंडारी पर आयकर चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोप हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा आरोप लगाया गया है कि भंडारी ने जानबूझकर भारत में कानूनी कार्यवाहियों से बचने की कोशिश की और 100 करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी संपत्ति का खुलासा नहीं किया।

👨‍💼 याचिका पर सुनवाई

भंडारी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में दलील दी कि यदि उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया जाता है, तो वे किसी भी प्रकार की कानूनी सहायता या अपील का अधिकार खो देंगे। उन्होंने अदालत से निवेदन किया कि ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश पर रोक लगाई जाए, क्योंकि इसके बाद उनकी संपत्तियां जब्त की जा सकती हैं।

वहीं, ED की ओर से अधिवक्ता ज़ोहेब हुसैन ने अदालत को बताया कि FEO अधिनियम का मूल उद्देश्य है कि ऐसे अपराधी भारत वापस आकर न्याय का सामना करें। उन्होंने यह भी कहा कि केवल याचिकाकर्ता के अनुरोध पर ट्रायल कोर्ट के आदेश पर रोक नहीं लगाई जा सकती। उन्होंने याचिका पर नोटिस जारी करने का भी विरोध किया।

🧾 न्यायमूर्ति का निर्णय

इस बहुचर्चित और विवादास्पद मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायमूर्ति गिरीश कटपालिया ने स्वयं को इस मामले की सुनवाई से अलग कर लिया। अब यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पास भेज दिया गया है, जो इसे किसी अन्य पीठ को सौंपेंगे।

📌 निष्कर्ष

संजय भंडारी का मामला न केवल भारत में आर्थिक अपराधों के खिलाफ कड़े कानूनों की ताकत को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक अपराधों के दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए भारत कितनी गंभीरता से काम कर रहा है। अब देखना यह है कि आगे की सुनवाई किस न्यायमूर्ति की पीठ में होगी और क्या संजय भंडारी को कोई राहत मिलती है या नहीं।


Exit mobile version