
कमलेश कुमार बहराइच
रिपोर्टर हिट एंड हॉट न्यूज़
सुजौली (रविदास नगर), 16 फरवरी 2026।
तेंदुए की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए सुजौली रेंज के अंतर्गत एक तेंदुआ प्रभावित गाँव में वन विभाग की ओर से जागरूकता गोष्ठी आयोजित की गई। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीणों को सजग करना, संभावित जोखिमों से बचाव के उपाय समझाना तथा मानव–वन्य जीव संघर्ष की घटनाओं को कम करना था। बैठक में वन कर्मियों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया।
सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव
गोष्ठी के दौरान वन अधिकारियों ने बताया कि जंगलों के सीमावर्ती क्षेत्रों में तेंदुए का आना असामान्य नहीं है, परंतु घबराहट और अफवाहें स्थिति को गंभीर बना सकती हैं। ग्रामीणों से अपील की गई कि यदि कहीं तेंदुआ दिखाई दे तो स्वयं कोई जोखिम न उठाएँ, बल्कि तुरंत वन चौकी को सूचना दें। समय पर सूचना मिलने से वन विभाग की टीम सुरक्षित तरीके से जंगली जीव को उसके प्राकृतिक आवास की ओर ले जा सकती है।
रात के समय विशेष सावधानी
ग्रामीणों को सुझाव दिया गया कि अंधेरा होने के बाद अकेले बाहर न निकलें। अत्यंत आवश्यक होने पर टॉर्च, डंडा या लाठी साथ रखें और कोशिश करें कि समूह में ही आवागमन करें। सुनसान स्थानों पर जाते समय हल्की आवाज करते हुए चलना भी लाभदायक बताया गया, क्योंकि अधिकांश जंगली जानवर मानव उपस्थिति का आभास होने पर दूरी बनाए रखते हैं।
इसके अतिरिक्त बच्चों को शाम ढलते ही घर के भीतर रखने तथा पशुओं को सुरक्षित बाड़े में बांधने की सलाह दी गई। खुले स्थानों पर कचरा या खाद्य सामग्री न छोड़ने की भी हिदायत दी गई, जिससे जंगली जानवर आकर्षित न हों।
सहयोग से ही मिलेगा समाधान
इस अवसर पर उपस्थित वन विभाग के कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि मानव और वन्य जीव दोनों की सुरक्षा समान रूप से आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जागरूकता, संयम और सामूहिक सतर्कता ही संघर्ष की घटनाओं को रोक सकती है। ग्रामीणों से विभाग के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत जानकारी देने का आग्रह किया गया।
ग्रामीणों का सकारात्मक रुख
बैठक के अंत में ग्रामीणों ने आश्वासन दिया कि वे दिए गए निर्देशों का पालन करेंगे और वन विभाग को पूरा सहयोग देंगे। साथ ही भविष्य में भी ऐसी जागरूकता बैठकों के आयोजन की मांग की, ताकि सभी लोग समय-समय पर जरूरी जानकारी प्राप्त कर सकें।
यह पहल स्पष्ट करती है कि यदि प्रशासन और स्थानीय समुदाय मिलकर प्रयास करें, तो मानव–वन्य जीव संघर्ष को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है और दोनों के बीच संतुलन बनाए रखा जा सकता है।