
मुंबई में भारत और फ्रांस के बीच कूटनीतिक संबंधों को नई ऊर्जा देने वाली एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की। यह बैठक केवल औपचारिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और गहराई देने का एक ठोस प्रयास भी थी।
रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती
भारत और फ्रांस के संबंध लंबे समय से विश्वास और सहयोग पर आधारित रहे हैं। दोनों देश रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में करीबी सहयोग करते रहे हैं। मुंबई में हुई इस उच्चस्तरीय वार्ता में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने, आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त प्रयासों और वैश्विक चुनौतियों पर साझा दृष्टिकोण को लेकर चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा कि भारत-फ्रांस संबंध केवल सरकारों के बीच नहीं, बल्कि दोनों देशों के नागरिकों के बीच भी गहरे विश्वास का प्रतीक हैं। वहीं राष्ट्रपति मैक्रों ने भारत को वैश्विक मंच पर एक महत्वपूर्ण साझेदार बताते हुए द्विपक्षीय सहयोग को और विस्तार देने की प्रतिबद्धता दोहराई।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग
बैठक के दौरान रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। फ्रांस भारत का एक प्रमुख रक्षा साझेदार है, और दोनों देशों के बीच उन्नत सैन्य तकनीक, संयुक्त अभ्यास और रक्षा उत्पादन को लेकर निरंतर संवाद चलता रहा है। स्वदेशीकरण और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत रक्षा उत्पादन में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर भी चर्चा हुई।
आर्थिक और व्यापारिक संबंध
मुंबई, जो भारत की आर्थिक राजधानी है, इस वार्ता के लिए एक प्रतीकात्मक और रणनीतिक स्थान रहा। दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश के अवसरों को विस्तार देने पर सहमति व्यक्त की। हरित ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, डिजिटल नवाचार और बुनियादी ढांचा विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।
भारत-फ्रांस के बीच द्विपक्षीय व्यापार में निरंतर वृद्धि देखी गई है, और दोनों देशों ने इसे और सुदृढ़ बनाने की प्रतिबद्धता जताई। फ्रांसीसी कंपनियों को भारत में निवेश के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करने और भारतीय उद्योगों को फ्रांस में अवसर उपलब्ध कराने पर भी बल दिया गया।
जलवायु परिवर्तन और सतत विकास
जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए दोनों नेताओं ने साझा प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। स्वच्छ ऊर्जा, सौर ऊर्जा और हरित प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग को और आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया। सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए संयुक्त पहल और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समन्वय बनाए रखने पर भी सहमति बनी।
सांस्कृतिक और जन-से-जन संपर्क
राजनयिक संबंधों के साथ-साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी दोनों देशों के रिश्तों की मजबूत कड़ी है। शिक्षा, पर्यटन, कला और भाषा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक चर्चा हुई। छात्र विनिमय कार्यक्रमों और शोध सहयोग को प्रोत्साहित करने की योजना पर भी विचार किया गया।
निष्कर्ष
मुंबई में हुई यह प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता भारत और फ्रांस के बीच बहुआयामी साझेदारी को नई दिशा देने वाली साबित हुई। यह बैठक न केवल द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी दोनों देशों की साझा भूमिका को मजबूत करेगी।
भारत और फ्रांस का यह सहयोग आने वाले समय में वैश्विक स्थिरता, आर्थिक प्रगति और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने की क्षमता रखता है। दोनों देशों की यह प्रतिबद्धता दर्शाती है कि परस्पर विश्वास और समान मूल्यों पर आधारित साझेदारी भविष्य में और अधिक सुदृढ़ होगी।