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ईरान में ताज़ा उथल-पुथल और अली खामेनेई की सख्त टिप्पणी

ईरान की राजनीतिक फिज़ा एक बार फिर तनावपूर्ण हो गई है। देश के सर्वोच्च नेता ने हाल में हुए प्रदर्शनों को सामान्य जनआंदोलन मानने से इनकार करते हुए इसे सुनियोजित “तख्तापलट की कोशिश” बताया है। उनके अनुसार यह घटनाक्रम स्वतःस्फूर्त जनाक्रोश नहीं था, बल्कि राज्य संस्थाओं को अस्थिर करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जनता के एक बड़े वर्ग और सुरक्षा बलों की तत्परता से यह प्रयास विफल कर दिया गया।


विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि

जनवरी 2026 में ईरान के विभिन्न शहरों में अचानक बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन शुरू हुए।

सरकार ने इन गतिविधियों को महज़ कानून-व्यवस्था की समस्या मानने के बजाय राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया।


खामेनेई का दृष्टिकोण

अली खामेनेई ने सार्वजनिक संबोधन में कहा कि यह आंदोलन बाहरी समर्थन से प्रेरित था। उनका आरोप है कि विदेशी शक्तियां ईरान की आंतरिक अस्थिरता को भड़काकर उसकी राजनीतिक और आर्थिक स्थिति को कमजोर करना चाहती हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बाहरी हस्तक्षेप या सैन्य दबाव बढ़ता है, तो इसका प्रभाव केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरा क्षेत्र प्रभावित हो सकता है।


सामाजिक और राजनीतिक असर

इन घटनाओं ने ईरान के भीतर गहरे मतभेदों को उजागर किया है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान और के बीच परमाणु समझौते को लेकर कूटनीतिक बातचीत जारी है। इस राजनीतिक अस्थिरता का असर अंतरराष्ट्रीय संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों पर भी पड़ सकता है।


आगे की दिशा

ईरान के सामने चुनौती दोहरी है—एक ओर आंतरिक असंतोष को संभालना, दूसरी ओर वैश्विक स्तर पर अपनी छवि और कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि सरकार संवाद और सुधार का रास्ता अपनाती है या सुरक्षा-केंद्रित नीति को और कड़ा करती है।

ईरान की यह स्थिति केवल एक देश की समस्या नहीं, बल्कि मध्य-पूर्व की राजनीति और वैश्विक शक्ति संतुलन से भी जुड़ी हुई है। इसलिए इस घटनाक्रम पर दुनिया की नजर बनी हुई है।

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