
सूरत (गुजरात), 18 फरवरी 2026।
गुजरात के सूरत शहर से एक अत्यंत गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें 12 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म कर उसे गर्भवती करने के मामले में विशेष POCSO अदालत ने नाबालिग आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सज़ा सुनाई है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों पर कानून किसी भी प्रकार की नरमी की इजाजत नहीं देता।
मामला क्या था?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी और पीड़िता एक-दूसरे को जानते थे। आरोपी ने बहला-फुसलाकर बच्ची के साथ बार-बार दुष्कर्म किया, जिसके परिणामस्वरूप वह गर्भवती हो गई। परिजनों को जब घटना का पता चला, तो उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। मेडिकल जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया।
मामला विशेष अदालत में चला, जहां अभियोजन पक्ष ने मेडिकल रिपोर्ट, डीएनए साक्ष्य और गवाहों के बयान पेश किए। अदालत ने सभी साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी को दोषी करार दिया।
POCSO कानून के तहत सख्त कार्रवाई
यह मामला Protection of Children from Sexual Offences Act (POCSO Act) के तहत दर्ज किया गया था। यह कानून विशेष रूप से बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों को रोकने और दोषियों को कठोर दंड दिलाने के लिए बनाया गया है।
अदालत ने कहा कि:
- नाबालिग की सहमति का कोई कानूनी महत्व नहीं है।
- पीड़िता की उम्र और शारीरिक-मानसिक क्षति को ध्यान में रखते हुए अधिकतम सज़ा उचित है।
- समाज में कड़ा संदेश देना आवश्यक है ताकि भविष्य में ऐसे अपराधों पर रोक लगे।
नाबालिग आरोपी को क्यों मिली 20 साल की सज़ा?
हालांकि आरोपी भी नाबालिग था, लेकिन अपराध की गंभीरता, पीड़िता की कम उम्र और गर्भवती होने की स्थिति को देखते हुए अदालत ने कठोर रुख अपनाया। कानून के तहत गंभीर यौन अपराधों में, भले ही आरोपी किशोर हो, उसे गंभीर दंड का सामना करना पड़ सकता है—विशेषकर तब, जब अपराध घोर प्रकृति का हो।
अदालत की टिप्पणी
विशेष POCSO न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि बच्चों की सुरक्षा समाज और राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि ऐसे मामलों में नरमी बरती गई तो यह न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध होगा। अदालत ने पीड़िता के पुनर्वास और परामर्श के लिए संबंधित प्राधिकरणों को आवश्यक निर्देश भी दिए।
समाज के लिए सबक
यह फैसला केवल एक सज़ा नहीं, बल्कि समाज के लिए चेतावनी है।
- अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा और संवाद पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
- स्कूलों और समुदायों में जागरूकता कार्यक्रमों की आवश्यकता है।
- बच्चों को अच्छे और बुरे स्पर्श के बारे में शिक्षित करना जरूरी है।
निष्कर्ष
सूरत की POCSO अदालत का यह निर्णय स्पष्ट करता है कि भारत में बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के प्रति न्यायपालिका का रुख बेहद सख्त है। 12 साल की बच्ची के साथ हुए इस अपराध पर 20 साल की सज़ा ने यह संदेश दिया है कि ऐसे जघन्य कृत्यों के लिए कोई सहानुभूति नहीं होगी।