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बागपत में 11 वर्षीय बच्ची के साथ चाकू के बल यौन अपराध, पिता गिरफ्तार

POCSO और IPC की धाराओं में केस दर्ज, पुलिस की सख्त कार्रवाई

बागपत (उत्तर प्रदेश), 18 फरवरी 2026:
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से एक बेहद संवेदनशील और शर्मनाक घटना सामने आई है। यहां 11 वर्षीय बच्ची के साथ उसके ही पिता द्वारा कथित तौर पर चाकू के बल यौन अपराध किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया।

घटना का विवरण

पुलिस के अनुसार, आरोपी ने नाबालिग बच्ची को धमकाकर अपराध को अंजाम दिया। बच्ची की हालत और मानसिक स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल चिकित्सीय परीक्षण और परामर्श के लिए भेजा गया। मामले की सूचना स्थानीय लोगों द्वारा पुलिस को दी गई, जिसके बाद टीम मौके पर पहुंची और आरोपी को हिरासत में ले लिया।

किन धाराओं में मामला दर्ज

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ POCSO (Protection of Children from Sexual Offences) Act तथा भारतीय दंड संहिता (IPC) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। चूंकि पीड़िता नाबालिग है, इसलिए कानून के अनुसार मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में की जा सकती है। दोष सिद्ध होने पर आरोपी को कठोर कारावास की सजा का प्रावधान है।

पुलिस का बयान

जिला पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पीड़िता और उसके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। साथ ही, मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच के लिए विशेष टीम गठित की गई है। पुलिस ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी को सख्त से सख्त सजा दिलाई जाएगी।

सामाजिक चिंता और कानूनी पहलू

यह घटना समाज में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। परिवार के भीतर होने वाले अपराधों को रोकने के लिए जागरूकता, परामर्श और सख्त कानूनी कार्रवाई बेहद आवश्यक है। POCSO अधिनियम बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाया गया है, जिसमें कठोर दंड और त्वरित न्याय की व्यवस्था है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में न केवल कानूनी कार्रवाई बल्कि पीड़ित को मनोवैज्ञानिक सहयोग और पुनर्वास भी उतना ही जरूरी है।

निष्कर्ष

बागपत की यह घटना समाज को झकझोरने वाली है। पुलिस की तत्परता से आरोपी की गिरफ्तारी तो हो गई है, लेकिन यह मामला एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। कानून का उद्देश्य केवल दंड देना ही नहीं, बल्कि समाज में भयमुक्त और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना भी है।

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