
नई दिल्ली, 18 फरवरी 2026 – राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी व पूर्व बिहार मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के खिलाफ बहुचर्चित ‘भूमि के बदले नौकरी’ (Land-for-Job) मामले में दिल्ली की एक विशेष अदालत ने औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए हैं। अदालत के इस निर्णय के साथ ही अब मामले में नियमित सुनवाई और गवाही की प्रक्रिया तेज़ होने की संभावना है।
क्या है ‘भूमि के बदले नौकरी’ मामला?
यह मामला उस समय से जुड़ा है जब लालू प्रसाद यादव वर्ष 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री थे। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस दौरान भारतीय रेलवे में ग्रुप-डी पदों पर नियुक्ति के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से कथित तौर पर जमीन के टुकड़े लिए गए।
जांच के अनुसार, ये जमीनें यादव परिवार के सदस्यों या उनसे जुड़ी कंपनियों के नाम पर कम कीमत पर हस्तांतरित की गईं। बदले में संबंधित लोगों को रेलवे में नौकरी दिलाए जाने का आरोप है।
जांच की पृष्ठभूमि
इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की गई।
- सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।
- ईडी ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग के कोण से अलग से जांच शुरू की।
जांच एजेंसियों का दावा है कि पटना और आसपास के क्षेत्रों में स्थित कई भूखंड यादव परिवार से जुड़ी कंपनियों के नाम दर्ज कराए गए।
अदालत का फैसला: आरोप तय
दिल्ली की विशेष अदालत ने प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य मानते हुए आरोप तय करने का आदेश दिया। आरोप तय होने का अर्थ यह नहीं है कि आरोप सिद्ध हो चुके हैं, बल्कि अदालत ने पाया है कि सुनवाई के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं।
अब अदालत में अभियोजन पक्ष अपने गवाह और दस्तावेज़ पेश करेगा, वहीं बचाव पक्ष को भी अपनी दलीलें रखने का अवसर मिलेगा।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
आरजेडी नेताओं ने इसे “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” करार दिया है। पार्टी का कहना है कि केंद्र सरकार विरोधी नेताओं को निशाना बना रही है।
वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि कानून अपना काम कर रहा है और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
लालू यादव और राबड़ी देवी का पक्ष
लालू प्रसाद यादव ने पहले भी इन आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है। राबड़ी देवी ने भी आरोपों से इनकार करते हुए खुद को निर्दोष बताया है।
उनकी ओर से अदालत में कहा गया है कि संपत्ति के लेन-देन वैध और कानूनी प्रक्रिया के तहत हुए हैं।
आगे की राह
अब इस मामले में नियमित सुनवाई होगी, जिसमें साक्ष्यों की जांच और गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो संबंधित धाराओं के तहत सज़ा का प्रावधान है; वहीं दोषमुक्त होने की स्थिति में सभी आरोप समाप्त हो सकते हैं।
यह मामला न केवल बिहार की राजनीति बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि यह भ्रष्टाचार के मुद्दे से सीधे जुड़ा है। आने वाले महीनों में अदालत की कार्यवाही पर राजनीतिक दलों और जनता की नज़र बनी रहेगी।