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अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक बेड़ा समीक्षा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की सहभागिता: समुद्री शक्ति और वैश्विक मित्रता का उत्सव

आयोजित अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक बेड़ा समीक्षा (International Fleet Review) ने भारत की समुद्री क्षमता और कूटनीतिक प्रतिबद्धता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। इस गरिमामय कार्यक्रम में की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष महत्व प्रदान किया। उन्होंने विभिन्न देशों से आए युद्धपोतों और भारतीय नौसेना के अत्याधुनिक जहाज़ों का निरीक्षण कर नौसैनिकों का उत्साहवर्धन किया।

सहयोग और सामूहिक सुरक्षा का संदेश

अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि यह समीक्षा केवल शक्ति-प्रदर्शन का मंच नहीं, बल्कि विश्वास, साझेदारी और पारस्परिक सम्मान की भावना को सुदृढ़ करने का अवसर है। उन्होंने रेखांकित किया कि समुद्र किसी एक राष्ट्र की सीमाओं में बंधे नहीं होते; इसलिए उनकी सुरक्षा और सतत उपयोग के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग अनिवार्य है।

महासागरों से विकास की राह

राष्ट्रपति ने इस बात पर बल दिया कि समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और संपर्क का आधार हैं। यदि राष्ट्र मिलकर सुरक्षित और मुक्त समुद्री परिवेश सुनिश्चित करें, तो महासागर शांति, समृद्धि और नवाचार के मार्ग खोल सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नौसेनाओं के बीच समन्वय आपदा प्रबंधन, मानवीय सहायता और समुद्री अपराधों की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

भारत की प्राचीन समुद्री परंपरा से आधुनिक शक्ति तक

भारत का समुद्री इतिहास हजारों वर्षों पुराना है, जब भारतीय व्यापारी और नाविक दूर-दूर तक यात्रा करते थे। वर्तमान संदर्भ में यह आयोजन उस विरासत को आधुनिक तकनीक, उन्नत जहाज़ निर्माण और रणनीतिक दक्षता से जोड़ता है। भारतीय नौसेना की पेशेवर क्षमता, अनुशासन और तकनीकी कौशल इस अवसर पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिए।

रणनीतिक और सांस्कृतिक आयाम

निष्कर्ष

अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक बेड़ा समीक्षा विश्व समुदाय को यह संदेश देती है कि सहयोग और संवाद ही स्थायी शांति की आधारशिला हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की सक्रिय सहभागिता ने इस आयोजन को ऐतिहासिक गरिमा प्रदान की। यह कार्यक्रम भारत को एक जिम्मेदार, सक्षम और विश्वसनीय समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित करता है, जो वैश्विक स्थिरता और साझा प्रगति के लिए प्रतिबद्ध है।

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