
यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध ने न केवल पूर्वी यूरोप बल्कि पूरे विश्व की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी है। हाल ही में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्ज़ेंडर लुकाशेंको पर कठोर प्रतिबंधों की घोषणा की है। यह कदम बेलारूस की उस भूमिका को उजागर करता है जिसमें उसने रूस की सैन्य गतिविधियों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन दिया है।
बेलारूस की भूमिका और आरोप
- ड्रोन नियंत्रण प्रणाली: 2025 की दूसरी छमाही में रूस ने बेलारूस की भूमि पर रिले स्टेशन तैनात किए, जिनसे यूक्रेन के उत्तरी क्षेत्रों पर हमले और अधिक प्रभावी हुए।
- औद्योगिक सहयोग: 3,000 से अधिक बेलारूसी कंपनियाँ रूस को युद्ध के लिए आवश्यक उपकरण, मशीनरी और मिसाइल उत्पादन हेतु महत्वपूर्ण पुर्ज़े उपलब्ध करा रही हैं।
- मिसाइल अवसंरचना: बेलारूस में “ओरेश्निक” नामक मध्यम दूरी की मिसाइल प्रणाली का विकास यूरोप के लिए भी गंभीर खतरा माना जा रहा है।
- सार्वभौमिकता का समझौता: लुकाशेंको पर आरोप है कि उन्होंने अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए बेलारूस की संप्रभुता को रूस के हितों के लिए गिरवी रख दिया है।
यूक्रेन का दृष्टिकोण
ज़ेलेंस्की का कहना है कि बेलारूस की यह भागीदारी केवल यूक्रेन के लिए ही नहीं बल्कि पूरे यूरोप की सुरक्षा के लिए खतरा है।
- ऊर्जा संयंत्रों और रेलवे नेटवर्क पर हुए हमलों में बेलारूस की तकनीकी सहायता निर्णायक रही।
- रूस को वैश्विक प्रतिबंधों से बचाने में बेलारूस सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
- यूक्रेन ने स्पष्ट किया है कि इस सहयोग के परिणामस्वरूप बेलारूस को “विशेष परिणामों” का सामना करना पड़ेगा।
वैश्विक प्रभाव
- यूरोप की सुरक्षा: मिसाइल तैनाती और औद्योगिक सहयोग से यूरोपीय देशों पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।
- अंतरराष्ट्रीय राजनीति: यह कदम पश्चिमी देशों को यूक्रेन के साथ और अधिक मजबूती से खड़ा होने के लिए प्रेरित कर सकता है।
- आर्थिक दबाव: बेलारूस पर लगाए गए प्रतिबंध उसकी अर्थव्यवस्था को गहरे संकट में डाल सकते हैं, खासकर तब जब वह पहले से ही रूस पर अत्यधिक निर्भर है।
निष्कर्ष
यूक्रेन का यह निर्णय केवल एक क्षेत्रीय प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि यह संदेश है कि किसी भी देश द्वारा आक्रामकता को समर्थन देने पर उसे वैश्विक स्तर पर परिणाम भुगतने होंगे। बेलारूस की भूमिका ने युद्ध को लंबा खींचने और अधिक विनाशकारी बनाने में योगदान दिया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस स्थिति पर कैसी प्रतिक्रिया देता है और क्या बेलारूस पर दबाव उसे अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर करेगा।