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ट्रम्प प्रशासन की स्वास्थ्य अनुदान कटौती पर सियासी घमासान

अमेरिका में सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। के नेतृत्व वाले प्रशासन ने हाल ही में लगभग 600 मिलियन डॉलर के सार्वजनिक स्वास्थ्य अनुदानों में कटौती की घोषणा की, जिसके बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय उन कार्यक्रमों को प्रभावित कर सकता है जो एचआईवी परीक्षण, रोकथाम और उपचार जैसी आवश्यक सेवाएँ प्रदान करते हैं।

विपक्ष का तीखा विरोध

अमेरिकी कांग्रेस की पूर्व स्पीकर ने इस फैसले को “असावधान और जनहित के प्रतिकूल” बताया है। उन्होंने सैन फ्रांसिस्को में सामुदायिक संगठनों और एलजीबीटीक्यू+ प्रतिनिधियों से मुलाकात कर चिंता जताई कि इस कटौती का सबसे बड़ा असर हाशिये पर रहने वाले समुदायों पर पड़ेगा। पेलोसी के अनुसार, सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों को राजनीतिक विचारधाराओं से प्रभावित नहीं होना चाहिए।

एलजीबीटी समुदाय पर संभावित प्रभाव

अमेरिका में एलजीबीटीक्यू+ समुदाय पहले ही स्वास्थ्य असमानताओं से जूझता रहा है। एचआईवी से संबंधित जागरूकता अभियान, मुफ्त परीक्षण सुविधाएँ और निरंतर उपचार कार्यक्रम इस समुदाय के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहे हैं। यदि वित्तीय संसाधन घटते हैं, तो—

इससे संक्रमण दर में वृद्धि का खतरा भी बढ़ सकता है, जो वर्षों की प्रगति को पीछे धकेल सकता है।

डेमोक्रेटिक पार्टी की रणनीति

के नेताओं ने संकेत दिया है कि वे इस कटौती के खिलाफ संसदीय स्तर पर आवाज उठाएंगे और वैकल्पिक बजट प्रस्ताव पेश करेंगे। उनका तर्क है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य निवेश को खर्च नहीं, बल्कि भविष्य की सुरक्षा के रूप में देखा जाना चाहिए। उनका मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में कमी से दीर्घकालिक सामाजिक और आर्थिक लागत बढ़ सकती है।

व्यापक असर: सिर्फ एक समुदाय तक सीमित नहीं

यह मुद्दा केवल एचआईवी कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है। सार्वजनिक स्वास्थ्य अनुदान टीकाकरण अभियानों, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं, नशामुक्ति योजनाओं और संक्रामक रोग नियंत्रण कार्यक्रमों के लिए भी उपयोग किए जाते हैं। फंडिंग में कमी का असर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्रों पर अधिक पड़ सकता है, जहां पहले से ही स्वास्थ्य संसाधनों की कमी है।

आगे की राह

इस फैसले ने अमेरिका में स्वास्थ्य नीति, सामाजिक समानता और सरकारी प्राथमिकताओं पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। एक ओर प्रशासन इसे बजट संतुलन की दिशा में कदम बता रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष और सामाजिक संगठन इसे संवेदनशील वर्गों के हितों पर चोट मान रहे हैं।

आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या राजनीतिक सहमति बन पाती है या यह मुद्दा चुनावी और वैचारिक टकराव का केंद्र बना रहेगा। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा यह निर्णय अमेरिकी समाज और राजनीति दोनों पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।

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