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हवा-हवाई हो गए हवाई अड्डे? विकास, गुणवत्ता और जवाबदेही पर एक गंभीर विमर्श

देश में बुनियादी ढांचे के तेज़ विकास को लेकर पिछले कुछ वर्षों में व्यापक प्रचार हुआ है। नई सड़कों, एक्सप्रेसवे, रेलवे स्टेशनों, मंदिर परिसरों और हवाई अड्डों के उद्घाटन को “नए भारत” की तस्वीर बताया गया। लेकिन साथ ही कई जगहों से निर्माण गुणवत्ता पर सवाल भी उठे हैं। कहीं पानी की टंकियाँ क्षतिग्रस्त होने की खबर आई, कहीं सार्वजनिक भवनों की छतों में रिसाव की शिकायतें सामने आईं, तो कहीं सड़कों और एक्सप्रेसवे की मजबूती पर बहस छिड़ी। इन घटनाओं ने विकास मॉडल और उसके क्रियान्वयन पर गंभीर चर्चा को जन्म दिया है।

हवाई अड्डों की स्थिति और उठते सवाल

कुछ नए या विस्तारित हवाई अड्डों पर तकनीकी खामियों की खबरें चर्चा में रही हैं। कहीं शेड का हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ, तो कहीं रखरखाव के अभाव की शिकायतें सामने आईं। विपक्षी दलों ने इसे शासन और निगरानी की विफलता बताया, जबकि सरकार का पक्ष है कि किसी भी बड़ी परियोजना में शुरुआती तकनीकी चुनौतियाँ आ सकती हैं और उन्हें समय रहते सुधारा जाता है।

एक्सप्रेसवे और लागत का मुद्दा

देशभर में एक्सप्रेसवे निर्माण तेज़ी से हुआ है। इसके समर्थक कहते हैं कि इससे परिवहन समय कम हुआ और निवेश को बढ़ावा मिला। लेकिन आलोचकों का तर्क है कि कुछ परियोजनाओं की लागत बढ़ी है और पारदर्शिता पर पर्याप्त जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में स्वतंत्र ऑडिट और नियमित गुणवत्ता परीक्षण जरूरी हैं।

सार्वजनिक भवन और रखरखाव

रेलवे स्टेशन आधुनिकीकरण और अन्य सार्वजनिक निर्माण परियोजनाओं को लेकर भी सवाल उठे हैं। कहीं दीवारों में दरारें, कहीं प्लास्टर झड़ने जैसी घटनाओं ने लोगों का ध्यान खींचा। निर्माण के साथ-साथ दीर्घकालिक रखरखाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है। केवल उद्घाटन करना पर्याप्त नहीं, बल्कि वर्षों तक सुरक्षा और मजबूती बनाए रखना असली कसौटी है।

“डबल इंजन” की बहस

जब केंद्र और राज्य में एक ही दल की सरकार होती है, तो उसे अक्सर “डबल इंजन सरकार” कहा जाता है। समर्थकों के अनुसार इससे नीति समन्वय बेहतर होता है और परियोजनाओं में तेजी आती है। आलोचक कहते हैं कि ऐसी स्थिति में जवाबदेही और भी स्पष्ट होनी चाहिए, क्योंकि निर्णय प्रक्रिया केंद्रीकृत हो जाती है।

यह भी ध्यान देना जरूरी है कि भारतीय राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप सामान्य हैं। भारतीय जनता पार्टी पर विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों का सरकार अक्सर खंडन करती रही है और अपने विकास कार्यों को उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करती है।

लोकतांत्रिक व्यवस्था में जवाबदेही

किसी भी लोकतांत्रिक शासन में यह अनिवार्य है कि:

निष्कर्ष

बुनियादी ढांचा केवल ईंट और सीमेंट का ढांचा नहीं, बल्कि जनता के विश्वास का प्रतीक है। यदि कहीं कमी है तो उसका समाधान संस्थागत सुधारों से निकलेगा, न कि केवल नारेबाज़ी से। विकास की असली पहचान टिकाऊ गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही में है।

जनता का अधिकार है कि वह सवाल पूछे, और सरकार का दायित्व है कि वह स्पष्ट जवाब दे—इसी से लोकतंत्र मजबूत होता है।

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