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भारत में नवीकरणीय ऊर्जा को लेकर एंटोनियो गुटेरेस की नई सोच: वैश्विक परिवर्तन की ओर बढ़ता भारत

हाल ही में भारत की स्वच्छ ऊर्जा पहलों की सराहना करते हुए एक स्पष्ट संदेश दिया कि दुनिया अब ऊर्जा परिवर्तन के निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। उन्होंने उद्योग जगत, वित्तीय संस्थानों, नीति-निर्माताओं और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों से मुलाकात के दौरान कहा कि भारत न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को नए तरीके से पूरा कर रहा है, बल्कि वह वैश्विक स्तर पर भी उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।

भारत की बढ़ती भूमिका

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन में उल्लेखनीय प्रगति की है। देश में बड़े पैमाने पर सोलर पार्क, रूफटॉप सौर संयंत्र और पवन ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जा रही हैं। इससे यह साबित हो रहा है कि तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था भी पर्यावरणीय जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ सकती है।

(ISA) जैसी पहल भारत की वैश्विक प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस मंच के माध्यम से कई देशों को सौर ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग और तकनीकी समर्थन मिल रहा है। भारत इस सहयोग का प्रमुख प्रेरक बनकर उभरा है।

गुटेरेस का स्पष्ट संदेश

गुटेरेस ने रेखांकित किया कि स्वच्छ ऊर्जा का भविष्य हमारे हाथ में है, लेकिन इसके लिए नीतिगत इच्छाशक्ति और दीर्घकालिक निवेश आवश्यक है। उन्होंने तीन प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया:

उनका मानना है कि यदि ऊर्जा संक्रमण को न्यायपूर्ण तरीके से लागू किया जाए, तो इससे रोजगार सृजन, नवाचार और आर्थिक मजबूती भी बढ़ेगी।

वैश्विक जलवायु लक्ष्य और भारत

यह पहल के उद्देश्यों के अनुरूप मानी जा रही है, जिसका लक्ष्य वैश्विक तापमान वृद्धि को नियंत्रित करना और कार्बन उत्सर्जन कम करना है। भारत का दृष्टिकोण यह संकेत देता है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हो सकते हैं।

भारत ने यह दिखाया है कि सही रणनीति, तकनीक और नीतिगत समर्थन के साथ ऊर्जा परिवर्तन केवल एक पर्यावरणीय अभियान नहीं, बल्कि आर्थिक अवसर भी बन सकता है।

निष्कर्ष

भारत की नवीकरणीय ऊर्जा यात्रा अब केवल राष्ट्रीय प्राथमिकता नहीं रही, बल्कि यह वैश्विक जलवायु कार्रवाई का एक अहम स्तंभ बनती जा रही है। एंटोनियो गुटेरेस का संदेश यह स्पष्ट करता है कि सामूहिक सहयोग, दूरदर्शी नीतियां और सतत निवेश से स्वच्छ ऊर्जा आधारित भविष्य को साकार किया जा सकता है।

यदि विश्व समुदाय मिलकर कदम बढ़ाए, तो ऊर्जा परिवर्तन केवल एक सपना नहीं, बल्कि निकट भविष्य की वास्तविकता बन सकता है।


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