
भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘मेक इन इंडिया’ पहल आज देश के औद्योगिक विकास की मजबूत आधारशिला बन चुकी है। प्रधानमंत्री Narendra Modi के दूरदर्शी नेतृत्व में इस अभियान ने न केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाई है, बल्कि करोड़ों युवाओं को रोजगार और कौशल विकास के अवसर भी उपलब्ध कराए हैं।
रोजगार सृजन में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
‘मेक इन इंडिया’ के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, रक्षा निर्माण, मोबाइल निर्माण, सेमीकंडक्टर असेंबली और उपभोक्ता उपकरण जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश आया है। देश में उत्पादन इकाइयों की संख्या बढ़ने से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर बने हैं।
विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टरों और औद्योगिक कॉरिडोरों ने स्थानीय स्तर पर रोजगार के द्वार खोले हैं, जिससे छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों के युवाओं को भी काम मिला है।
कौशल विकास को नई दिशा
तेजी से बदलती तकनीक के दौर में केवल रोजगार देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि युवाओं को भविष्य के उद्योगों के अनुरूप प्रशिक्षित करना भी आवश्यक है। इसी सोच के साथ उन्नत कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर जोर दिया गया है।
इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के अगले चरण — जैसे रोबोटिक्स, ड्रोन तकनीक, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), स्मार्ट कार, प्रिसीजन कंपोनेंट्स, एडवांस टूलिंग और स्मार्ट ग्लासेस — के लिए विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किए जा रहे हैं।
इससे भारत एक ऐसे कुशल कार्यबल की तैयारी कर रहा है जो वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिक सके और उच्च तकनीकी उत्पादन में अग्रणी भूमिका निभा सके।
महिलाओं को मिला सर्वाधिक लाभ
‘मेक इन इंडिया’ पहल का सबसे सकारात्मक प्रभाव महिलाओं पर देखा गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली, गुणवत्ता जांच, पैकेजिंग और डिजाइनिंग जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में महिलाओं को रोजगार मिला है।
इसके अलावा कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ने उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है। कई राज्यों में महिला कार्यबल की भागीदारी दर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।
महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्य वातावरण, लचीले कार्य घंटे और कौशल उन्नयन कार्यक्रमों ने उन्हें उद्योग क्षेत्र में मजबूती से स्थापित किया है। यह परिवर्तन केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण का भी प्रतीक है।
इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का अगला चरण
भारत अब केवल असेंबली आधारित उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि उच्च स्तरीय अनुसंधान, डिजाइन और उन्नत घटकों के निर्माण की ओर बढ़ रहा है।
रोबोटिक्स, ड्रोन निर्माण, EV बैटरी तकनीक, स्मार्ट मोबिलिटी, प्रिसीजन इंजीनियरिंग और एडवांस टूलिंग में निवेश से देश वैश्विक सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है।
स्मार्ट ग्लासेस और उभरती वेयरेबल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी भारत तेजी से अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है। इन क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवाओं की मांग आने वाले वर्षों में कई गुना बढ़ने की संभावना है।
आत्मनिर्भर भारत की ओर मजबूत कदम
‘मेक इन इंडिया’ केवल एक औद्योगिक अभियान नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। स्थानीय उत्पादन बढ़ने से आयात पर निर्भरता कम हुई है और निर्यात में वृद्धि हुई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह पहल भारत को पारंपरिक उद्योगों से आगे ले जाकर भविष्य की तकनीकों के केंद्र के रूप में स्थापित कर रही है।
निष्कर्ष
‘मेक इन इंडिया’ ने देश के युवाओं को नई दिशा दी है, महिलाओं को सशक्त बनाया है और भारत को वैश्विक विनिर्माण मानचित्र पर मजबूती से स्थापित किया है।
आने वाले समय में रोबोटिक्स, ड्रोन, इलेक्ट्रिक वाहन और स्मार्ट टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित कार्यबल के साथ भारत विश्व अर्थव्यवस्था में एक प्रमुख भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
यह पहल केवल उत्पादन की कहानी नहीं है, बल्कि यह नए भारत के निर्माण की कहानी है — एक ऐसा भारत जो कुशल, आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी है।