
प्रस्तावना
24 फरवरी 2026 को देशों के नेताओं ने यूक्रेन संघर्ष की चौथी वर्षगांठ पर एक साझा वक्तव्य जारी किया। इस अवसर पर उन्होंने एक बार फिर यूक्रेन की संप्रभुता, स्वतंत्र निर्णय लेने के अधिकार और उसकी क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन को दृढ़ता से दोहराया। यह बयान केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में एक स्पष्ट राजनीतिक और मानवीय संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
बयान के प्रमुख आयाम
1. संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून पर बल
नेताओं ने स्पष्ट किया कि किसी भी देश की सीमाओं और स्वतंत्र अस्तित्व का सम्मान अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की बुनियादी शर्त है। यूक्रेन के अधिकारों की रक्षा को उन्होंने वैश्विक स्थिरता से जोड़ा।
2. वार्ता आधारित समाधान की वकालत
संयुक्त बयान में यह रेखांकित किया गया कि स्थायी शांति का मार्ग संवाद से होकर गुजरता है। अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा आरंभ की गई कूटनीतिक पहल का उल्लेख करते हुए वार्ता को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
3. यूरोप की अग्रणी भूमिका
यूरोपीय देशों को इस पूरी प्रक्रिया में प्रमुख भागीदार बताया गया। यह संकेत भी दिया गया कि क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने में यूरोप की जिम्मेदारी और सक्रियता निर्णायक होगी।
4. सुरक्षा आश्वासन और सहयोग
“Coalition of the Willing” जैसे साझेदारी प्रयासों के माध्यम से यूक्रेन को भरोसेमंद सुरक्षा गारंटी देने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। इसके साथ आर्थिक और सैन्य सहयोग जारी रखने की बात भी सामने आई।
5. ईमानदार और टिकाऊ समझौते की आवश्यकता
नेताओं ने माना कि दीर्घकालिक शांति केवल तभी संभव है जब संबंधित पक्ष गंभीरता और ईमानदारी से बातचीत करें। किसी भी अस्थायी समझौते के बजाय स्थायी समाधान को प्राथमिकता देने की बात कही गई।
व्यापक परिप्रेक्ष्य में महत्व
राजनीतिक संकेत:
यह संदेश रूस के लिए स्पष्ट संकेत है कि पश्चिमी शक्तियाँ अपने रुख में बदलाव के मूड में नहीं हैं।
कूटनीतिक रणनीति:
बयान से यह धारणा मजबूत होती है कि सैन्य समर्थन के साथ-साथ कूटनीतिक पहलों को समान महत्व दिया जा रहा है।
क्षेत्रीय स्थिरता:
यूरोप की सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि यह संघर्ष केवल दो देशों तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे महाद्वीप की सुरक्षा संरचना से जुड़ा है।
वैश्विक दृष्टिकोण:
अमेरिका, यूरोप और अन्य सहयोगियों की एकजुटता यह दर्शाती है कि यूक्रेन संकट को व्यापक अंतरराष्ट्रीय चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
मानवीय और सामाजिक प्रभाव
लगातार जारी संघर्ष ने लाखों लोगों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर किया है और अनेक शहरों की आधारभूत संरचना को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। ऐसे में जी7 देशों का समर्थन केवल राजनीतिक बयान तक सीमित नहीं, बल्कि राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण में भी अहम भूमिका निभा सकता है। आर्थिक सहायता, पुनर्निर्माण पैकेज और सुरक्षा सहयोग यूक्रेन के भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।
निष्कर्ष
जी7 नेताओं का यह ताज़ा वक्तव्य अंतरराष्ट्रीय एकता का संकेत देता है। इससे यह स्पष्ट है कि वैश्विक शक्तियाँ संघर्ष को समाप्त करने और संतुलित, टिकाऊ शांति स्थापित करने की दिशा में प्रयासरत हैं। यूरोप की केंद्रीय भूमिका और व्यापक वैश्विक सहयोग आने वाले समय में इस संकट के समाधान को निर्णायक मोड़ दे सकते हैं।