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2026-27 के लिए कच्चे जूट का MSP ₹5,925 प्रति क्विंटल तय, किसानों को लागत पर 61.8% लाभ सुनिश्चित

देश के जूट उत्पादक किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। Union Cabinet ने विपणन सत्र 2026-27 के लिए कच्चे जूट का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹5,925 प्रति क्विंटल निर्धारित करने को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय से किसानों को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत पर 61.8 प्रतिशत का लाभ सुनिश्चित होगा, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है।

किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में मजबूत पहल

केंद्र सरकार का यह फैसला जूट उत्पादकों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। MSP में यह वृद्धि न केवल किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाएगी, बल्कि उन्हें बाजार में मूल्य गिरावट के जोखिम से भी सुरक्षा प्रदान करेगी।

कच्चा जूट मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, ओडिशा और मेघालय जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर उगाया जाता है। इन क्षेत्रों के लाखों किसान प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जूट उत्पादन पर निर्भर हैं। ऐसे में MSP में बढ़ोतरी उनके जीवन स्तर को सुधारने में सहायक होगी।

लागत से अधिक लाभ की गारंटी

सरकार द्वारा तय किया गया ₹5,925 प्रति क्विंटल का MSP उत्पादन लागत की तुलना में 61.8 प्रतिशत अधिक है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि किसानों को उनकी मेहनत का उचित प्रतिफल मिले। बढ़ती लागत—जैसे बीज, उर्वरक, श्रम और परिवहन—को देखते हुए यह निर्णय समयानुकूल माना जा रहा है।

जूट उद्योग को भी मिलेगा प्रोत्साहन

जूट एक पर्यावरण-अनुकूल फसल है और प्लास्टिक के विकल्प के रूप में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। MSP में वृद्धि से जूट उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे जूट उद्योग को भी मजबूती मिलेगी। इससे संबंधित लघु एवं कुटीर उद्योगों के विकास को भी गति मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

किसानों की आय बढ़ने से ग्रामीण बाजारों में क्रय शक्ति बढ़ेगी, जिससे समग्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। सरकार का यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ और किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

निष्कर्ष

विपणन सत्र 2026-27 के लिए कच्चे जूट का MSP ₹5,925 प्रति क्विंटल निर्धारित किया जाना जूट उत्पादक किसानों के लिए राहत और उम्मीद लेकर आया है। 61.8 प्रतिशत लाभ सुनिश्चित होने से किसानों को आर्थिक स्थिरता मिलेगी और जूट उत्पादन को नया प्रोत्साहन मिलेगा। यह निर्णय कृषि क्षेत्र और ग्रामीण विकास दोनों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।

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