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पटना के नजदीक सोन नदी किनारे अवैध बालू उत्खनन पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

पटना (बिहार): राजधानी के आसपास स्थित के तटीय क्षेत्रों में जारी अवैध बालू खनन को लेकर प्रशासन अब पूरी तरह सक्रिय हो गया है। लगातार मिल रही शिकायतों और पर्यावरणीय चिंताओं को देखते हुए जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और खनन शाखा की संयुक्त टीम ने विशेष निगरानी अभियान शुरू किया है। संवेदनशील घाटों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किए गए हैं और आपात प्रतिक्रिया दलों को भी अलर्ट मोड में रखा गया है, ताकि किसी भी अवैध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

प्रशासन की रणनीति क्या है?

अधिकारियों के अनुसार, कई स्थानों पर बिना अनुमति भारी मशीनों के जरिए रात के समय बड़े पैमाने पर बालू निकाला जा रहा था। इसको रोकने के लिए अब ड्रोन निगरानी, रात में गश्त और चेक पोस्टों की संख्या बढ़ा दी गई है। बालू लदे वाहनों की सघन जांच की जा रही है और आवश्यक दस्तावेज नहीं मिलने पर जब्ती की कार्रवाई की जा रही है।

क्यों बनी गंभीर स्थिति?

स्थानीय लोगों का कहना है कि अनियंत्रित खनन से नदी के प्रवाह में बदलाव आ रहा है। इससे तटबंधों की मजबूती पर असर पड़ सकता है और बारिश के मौसम में कटाव तथा बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो आसपास के गांवों की कृषि भूमि और आवासीय क्षेत्रों को नुकसान हो सकता है।

सख्त चेतावनी

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनन में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वाहन जब्ती, भारी जुर्माना और प्राथमिकी दर्ज करने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। अधिकारियों ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत प्रशासन को दें।

पर्यावरण संरक्षण पर जोर

सरकार का कहना है कि नदी और पर्यावरण की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। संतुलित और वैध खनन नीति के तहत ही बालू निकासी की अनुमति दी जाएगी। अवैध खनन से न केवल राजस्व का नुकसान होता है, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों का भी क्षरण होता है।

प्रशासन की इस पहल से उम्मीद है कि के आसपास चल रही गैरकानूनी खनन गतिविधियों पर प्रभावी लगाम लगेगी और नदी क्षेत्र की पारिस्थितिकी की रक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।

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