
26 फरवरी 2026 को यूक्रेन की राजधानी में राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने देश के पूर्व विदेश मंत्री पाव्लो क्लिमकिन से विस्तृत चर्चा की। यह मुलाकात यूक्रेन की बदलती विदेश नीति, क्षेत्रीय सुरक्षा और यूरोप के साथ संबंधों को नए सिरे से सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बीच इस बैठक को रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम समझा जा रहा है।
बदलते भू-राजनीतिक हालात पर मंथन
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने यूक्रेन के आसपास के जटिल और तेजी से बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य का आकलन किया। विशेष रूप से पूर्वी यूरोप की स्थिति, क्षेत्रीय अस्थिरता और प्रमुख शक्तियों के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक कूटनीतिक रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया। राष्ट्रपति ने स्पष्ट संकेत दिए कि वैश्विक मंच पर यूक्रेन की सक्रियता और प्रभाव को और बढ़ाना समय की मांग है।
यूरोप में मज़बूत उपस्थिति पर ज़ोर
ज़ेलेंस्की ने इस बात पर बल दिया कि यूक्रेन को यूरोपीय देशों के साथ अपने राजनीतिक, आर्थिक और सामरिक संबंधों को और गहरा करना होगा। यूरोपीय समुदाय के साथ समन्वय बढ़ाना और साझा मूल्यों—लोकतंत्र, संप्रभुता और मानवाधिकार—के आधार पर साझेदारी को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है।
नए सहयोग क्षेत्रों की तलाश
चर्चा के दौरान संभावित नए साझेदारी क्षेत्रों की भी पहचान की गई। इसमें आर्थिक सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा संवाद, ऊर्जा समन्वय और प्रवासी यूक्रेनी समुदायों के साथ संपर्क को सुदृढ़ करना शामिल है। क्लिमकिन के कूटनीतिक अनुभव को देखते हुए राष्ट्रपति ने उन्हें कुछ विशेष पहलों में योगदान देने का प्रस्ताव भी रखा।
विदेश मंत्रालय में संभावित बदलाव
बैठक में संस्थागत सुधारों पर भी संकेत मिले। जानकारी के अनुसार, विदेश मंत्रालय में कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कुछ स्तरों पर बदलाव किए जा सकते हैं। साथ ही बेलारूस से जुड़े मामलों के लिए एक विशेष प्रतिनिधि नियुक्त करने की तैयारी भी विचाराधीन है, ताकि क्षेत्रीय जटिलताओं को बेहतर ढंग से संभाला जा सके।
अनुभव और रणनीति का संगम
पाव्लो क्लिमकिन 2014 से 2019 तक यूक्रेन के विदेश मंत्री रहे और उन्होंने चुनौतीपूर्ण समय में देश की विदेश नीति को दिशा दी थी। रूस के साथ तनावपूर्ण संबंधों के दौर में उनकी भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। ऐसे में उनका अनुभव वर्तमान नेतृत्व के लिए मार्गदर्शन का कार्य कर सकता है।
व्यापक रणनीतिक महत्व
इस मुलाकात का एक अहम पहलू रूस के प्रभाव को संतुलित करने की रणनीति से भी जुड़ा है। सरकार का मानना है कि जिन क्षेत्रों में राजनीतिक स्वतंत्रता सीमित है या बाहरी दबाव अधिक है, वहां यूक्रेन को अपनी कूटनीतिक मौजूदगी बढ़ानी चाहिए। इसके साथ ही यूरोप और पड़ोसी देशों में रहने वाले समुदायों के साथ संवाद को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
निष्कर्ष
ज़ेलेंस्की और क्लिमकिन की यह बैठक केवल शिष्टाचार भेंट भर नहीं थी, बल्कि यूक्रेन की विदेश नीति की आगामी दिशा तय करने की एक ठोस पहल थी। यह स्पष्ट संकेत है कि यूक्रेन आने वाले समय में अधिक सक्रिय, संतुलित और रणनीतिक कूटनीति अपनाने की तैयारी कर रहा है। अनुभवी नेतृत्व और नए दृष्टिकोण के संयोजन से देश वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति को और सुदृढ़ करने की ओर अग्रसर है।